24 न्यूज अपडेट नेशनल डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर अपने पहले के दावों से पीछे हटते हुए अब यह कहा है कि उन्होंने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता नहीं की, बल्कि केवल मदद की है। ट्रम्प का यह नया बयान कतर दौरे के दौरान दोहा स्थित अल उदीद एयरबेस पर सैनिकों को संबोधित करते समय सामने आया। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बहुत भयानक रूप ले सकता था, लेकिन अमेरिका ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालने में मदद की। 10 मई को ट्रम्प ने दावा किया था कि अमेरिका की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान पूर्ण और तत्काल युद्धविराम पर सहमत हुए हैं। उन्होंने इसे अमेरिका की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया था और दोनों देशों की समझदारी की सराहना की थी। हालांकि, इसके बाद लगातार दिए गए बयानों में ट्रम्प के रुख में बदलाव देखा गया।
11 से 13 मई के बीच ट्रम्प ने कभी भारत-पाकिस्तान की लीडरशिप की तारीफ की, कभी खुद को परमाणु युद्ध रोकने का श्रेय दिया, और कभी यह कहा कि उन्होंने व्यापार का सहारा लेकर सीजफायर में मदद की।
अंततः 15 मई को ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने कोई सीजफायर नहीं कराया, बल्कि दोनों देशों को समझाने की कोशिश की और व्यापार की बात की। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत और पाकिस्तान बीते 1000 वर्षों से लड़ रहे हैं और अब उन्हें एक नई दिशा की जरूरत है।
भारत-पाक तनाव की पृष्ठभूमि में 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की बड़ी भूमिका रही, जिसमें 26 पर्यटकों की धर्म पूछकर हत्या कर दी गई थी। इसके 15 दिन बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में 9 आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक कर 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया। इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठे कि ट्रम्प की “मध्यस्थता“ कितनी प्रभावी और सटीक थी, या यह केवल एक राजनीतिक बयानबाजी थी।
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