24 News Upate उदयपुर। प्रदेश में डिजिटल शिक्षा, स्टार्टअप संस्कृति और युवाओं के लिए कामकाजी स्पेस तैयार करने की मंशा से वर्ष 2024-25 के बजट में घोषित 150 करोड़ रुपये की वाई-फाई एनेबल्ड लाइब्रेरी एवं को-वर्किंग स्टेशन योजना अब प्रशासनिक उदासीनता और निकायों की सुस्ती के चलते लैप्स होने की कगार पर पहुंच गई है। हालात यह हैं कि प्रदेश के 200 से अधिक नगर निगमों व नगर परिषदों में से अब तक केवल 18 शहरी निकायों ने ही आवेदन किया है, जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में गिनती के दिन शेष बचे हैं।राज्य सरकार की बजट घोषणा के अनुसार, जिला स्तर एवं चयनित शहरी निकायों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त लाइब्रेरी व को-वर्किंग स्टेशन विकसित किए जाने थे, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं, फ्रीलांसरों, स्टार्टअप्स और शोधार्थियों को एक साझा डिजिटल मंच मिल सके। लेकिन योजना कागजों से आगे बढ़ने से पहले ही समय के जाल में उलझती नजर आ रही है।स्वायत्त शासन विभाग के अधीन नगर निगम व नगर परिषदों को निर्माण और स्थान चयन की जिम्मेदारी दी गई थी, जबकि इंटरनेट व तकनीकी ढांचे की जिम्मेदारी डीओआईटी एंड सी को सौंपी गई। इसी सिलसिले में 27 दिसंबर 2025 को स्थानीय निकाय निदेशक एवं विशिष्ट सचिव द्वारा सभी आयुक्तों को निर्देश जारी किए गए थे कि वे नगर विकास प्राधिकरण अथवा नगर विकास न्यास से समन्वय कर अपने क्षेत्र में उपयुक्त भवन—जैसे सामुदायिक भवन, सूचना केंद्र या सार्वजनिक पुस्तकालय—चिन्हित कर 29 दिसंबर 2025 तक गूगल ड्राइव पर विवरण अपलोड कराएं।निर्देशों के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि उदयपुर सहित महज 18 निकायों ने ही औपचारिकता पूरी की। प्रशासनिक हलकों में इसे लेकर गहरी चिंता है कि यदि जल्द प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई गई, तो घोषित बजट बिना उपयोग के ही वित्तीय वर्ष के अंत में वापस चला जाएगा।उदयपुर में उदयपुर नगर निगम ने अशोक नगर स्थित ई-पब्लिक लाइब्रेरी भवन में लगभग 5000 वर्गफुट क्षेत्र में वाई-फाई एनेबल्ड लाइब्रेरी व को-वर्किंग स्टेशन विकसित करने का प्रस्ताव भेजा है। निगम ने समय रहते स्थान का विवरण अपलोड कर अधिकतम राशि आवंटन के लिए पत्राचार भी कर दिया है। निगम अधिकारियों का कहना है कि यदि आयुक्त स्तर पर व्यक्तिगत रुचि और फॉलो-अप नहीं हुआ, तो यह महत्वाकांक्षी योजना भी अन्य अधूरी घोषणाओं की सूची में शामिल हो सकती है।निगम सूत्रों का सुझाव है कि जिन निकायों ने आवेदन कर रुचि दिखाई है, उन्हीं के बीच पूरे 150 करोड़ रुपये का आवंटन कर दिया जाए, ताकि योजना आंशिक रूप से ही सही, लेकिन जमीन पर उतर सके। जिन निकायों ने अब तक कोई पहल नहीं की, उनकी अरुचि को देखते हुए उन्हें इस चरण से बाहर रखा जाए।फिलहाल, सवाल यही है कि क्या डिजिटल युग में लाइब्रेरी और को-वर्किंग जैसे बुनियादी ढांचे की यह योजना समय रहते रफ्तार पकड़ पाएगी, या फिर फाइलों और तारीखों के बीच फंसकर 150 करोड़ रुपये कागजों में ही लैप्स हो जाएंगे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation Paras Health Udaipur में डॉ. अमित खंडेलवाल ने किया हाई-रिस्क TAVI सफल, 75 वर्षीय मरीज को मिली नई जिंदगी शिक्षा अधिकारियों का सकारात्मक संबलन ही गुणवत्ता की कुंजी : शेर सिंह चौहान