24 News Update जयपुर। राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए शिक्षा विभाग ने पांचवीं कक्षा के लिए सख्त मूल्यांकन प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। सत्र 2026-27 से अब विद्यार्थियों को बिना मूल्यांकन अगली कक्षा में भेजने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। इसके साथ ही “नो-डिटेंशन पॉलिसी” पर प्रभावी रूप से रोक लगा दी गई है।
नए प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई छात्र वार्षिक परीक्षा में निर्धारित स्तर हासिल नहीं कर पाता है, तो उसे पूरक परीक्षा का अवसर दिया जाएगा। हालांकि, इस परीक्षा में उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा। पूरक परीक्षा में भी असफल रहने की स्थिति में छात्र को उसी कक्षा में दोबारा अध्ययन करना होगा। शिक्षा विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि इस कदम का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना और विद्यार्थियों के वास्तविक शैक्षणिक स्तर का आकलन सुनिश्चित करना है। अब तक आठवीं कक्षा तक लागू सख्ती के दायरे को बढ़ाते हुए इसे पांचवीं कक्षा तक विस्तारित किया गया है।
इस फैसले के बाद स्कूलों में पढ़ाई और मूल्यांकन की प्रक्रिया में अधिक गंभीरता आने की संभावना है। शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ेगी, वहीं विद्यार्थियों और अभिभावकों को भी अब पढ़ाई को लेकर अधिक सजग रहना पड़ेगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धात्मक भावना और सीखने की वास्तविक प्रवृत्ति को बढ़ावा देगा, हालांकि इससे शुरुआती कक्षाओं में दबाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
पांचवीं में भी अब ‘पास होना जरूरी’: शिक्षा विभाग ने खत्म की स्वतः प्रमोशन व्यवस्था

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