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रेलवे अंडरपास में जलभराव से राहत के लिए उत्तर पश्चिम रेलवे ने की विशेष तैयारी, ₹18.32 करोड़ की लागत से 167 स्थानों पर पंप और 328 चौकीदार तैनात

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24 न्यूज अपडेट, जयपुर। मानसून के दौरान रेलवे अंडरपास में जलभराव की पुरानी समस्या से निजात दिलाने के लिए उत्तर पश्चिम रेलवे ने व्यापक और ठोस कदम उठाए हैं। रेलवे प्रशासन ने अंडरपास में पानी भरने की आशंका वाले सभी स्थानों की पहचान कर वहां जल निकासी और यातायात सुरक्षा की विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। इस कार्य पर वर्ष 2024–25 के दौरान कुल ₹18.32 करोड़ की पूंजीगत व्यय किया गया है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक श्री अमिताभ के निर्देश पर आयोजित संरक्षा बैठक में इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया गया और रेलवे के संबंधित विभागों को जलभराव से निपटने के लिए आवश्यक निर्माण और तकनीकी उपाय लागू करने के निर्देश दिए गए। इसके अनुपालन में अंडरपास में पानी के बहाव को रोकने के लिए बांध और अन्य निर्माण कार्य किए गए हैं, वहीं पहले से बने जल पुनर्भरण कुओं की सफाई व गहरीकरण भी करवा दिया गया है ताकि बारिश का पानी शीघ्र निकाला जा सके।
रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री शशि किरण ने बताया कि उत्तर पश्चिम रेलवे ने 167 रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) पर जल निकासी के लिए पंप लगाए हैं, जिससे जलभराव की स्थिति में तुरंत पानी निकाला जा सके। साथ ही, भारी वर्षा की स्थिति में यातायात को नियंत्रित करने और किसी भी दुर्घटना से बचाव के लिए 328 स्थायी चौकीदारों की तैनाती की गई है।
सड़क यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी अंडरपासों पर जल स्तर मापक मार्किंग की गई है। इसके अतिरिक्त, खतरनाक जल स्तर की स्थिति में लोगों को आगाह करने के लिए चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। प्रत्येक अंडरपास पर जलभराव की स्थिति की सूचना रेलवे को देने के निर्देश भी अंकित किए गए हैं, जिससे समय पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
रेलवे ने यह भी सुनिश्चित किया है कि आस-पास के ऊंचाई वाले क्षेत्रों से अंडरपास में पानी बहकर आने की स्थिति को रोकने के लिए स्थानीय निकायों और पंचायतों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए। इस सहयोग से प्राकृतिक जल प्रवाह को नियोजित ढंग से नियंत्रित किया जा सकेगा और अंडरपास की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
रेलवे प्रशासन का यह प्रयास मानसून में यात्रियों की सुरक्षा, निर्बाध यातायात और संरक्षा प्रबंधन के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे रेलवे नेटवर्क पर आवागमन बाधित न हो और यात्रियों को परेशानी से बचाया जा सके।

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