24 News Update नई दिल्ली। पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद देश की राजनीति में बड़ा उलटफेर साफ दिखने लगा है। सबसे बड़ी कहानी पश्चिम बंगाल से निकलकर आई है, जहां पहली बार भारतीय जनता पार्टी सरकार बनाने जा रही है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के मुताबिक 9 मई को नई सरकार का शपथग्रहण होगा—यानी वही दिन जब रवींद्र नाथ टैगोर की जयंती भी मनाई जाती है।
सत्ता के मंच पर ‘शाह’ की निगरानी
बंगाल में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पर्यवेक्षक बनाया गया है। वहीं असम के लिए जेपी नड्डा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह साफ संकेत है कि पार्टी इन राज्यों में सत्ता गठन को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
‘सिस्टम’ से बाहर, फिर सिस्टम के भीतर जीत
इस चुनाव की सबसे दिलचस्प कहानी फरक्का सीट से सामने आई। मोताब शेख का नाम वोटर लिस्ट से ही हटा दिया गया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां से राहत मिली और नाम बहाल हुआ। इसके बाद उन्होंने चुनाव लड़ा और 8 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज कर विधायक बन गए—यह लोकतंत्र की विडंबना भी है और ताकत भी।
हार का ठीकरा, सियासत का खेल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी समेत कई नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस की हार के लिए सीधे ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया है। उधर ममता ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं—यानि हार के बाद ‘नैरेटिव की जंग’ शुरू हो चुकी है।
एजेंसियां भी एक्टिव, सियासत भी गर्म
इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय ने कोलकाता के डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है। यह कार्रवाई बालीगंज से जुड़े कथित सिंडिकेट केस में की जा रही है। चुनाव के तुरंत बाद एजेंसियों की सक्रियता ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।
बाकी राज्यों में भी नई तस्वीर
तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है, जबकि केरल में कांग्रेस को बढ़त मिली है। पुडुचेरी में NDA सरकार बनाने की तैयारी में है।
हिमंता बिस्वा सरमा ने बंगाल की जीत को “देश की जीत” बताते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ दिया—जो इस चुनावी नतीजे को सिर्फ राज्य की राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बना देता है।? गंगासागर से कन्याकुमारी” तक फैले इन नतीजों ने विपक्ष के बड़े चेहरों—ममता बनर्जी और एम. के. स्टालिन—को झटका दिया है। आंकड़े बताते हैं कि अब देश की करीब 78% आबादी और 72% भूभाग पर भाजपा या उसके सहयोगियों का प्रभाव है।

