24 News Update उदयपुर। केंद्र सरकार की श्रम और आर्थिक नीतियों के विरोध में बुधवार को देशभर में आहूत राष्ट्रव्यापी श्रमिक हड़ताल का असर उदयपुर में भी देखने को मिला। विभिन्न श्रमिक संगठनों, किसान संगठनों और कर्मचारी यूनियनों ने शहर में रैली निकालकर जिला कलेक्ट्री पर जोरदार प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि देशभर में 30 करोड़ से अधिक श्रमिक, कर्मचारी और किसान इस हड़ताल में शामिल हुए हैं। उदयपुर में सीटू, इंटक, एटक, बैंक, बीमा, ठेला व्यवसायी, मजदूर और किसान संगठनों से जुड़े सैकड़ों लोग प्रदर्शन में शामिल हुए।
प्रदर्शन से पहले टाउन हॉल से रैली निकाली गई, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई जिला कलेक्ट्री पहुंची। रैली के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
संगठनों के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां श्रमिकों और किसानों के हितों के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि एक ओर अंबानी और अडानी जैसे बड़े उद्योगपतियों की पूंजी में लगातार वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर मजदूर, किसान और महिलाएं आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है।
नेताओं ने अमेरिका से हुए व्यापार समझौते पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बिना ड्यूटी के विदेशी कृषि उत्पादों के आयात से देश के किसानों को नुकसान होगा। इससे किसानों की लागत बढ़ेगी, फसल चयन की स्वतंत्रता प्रभावित होगी और खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि होगी।
प्रदर्शन के दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि सरकार द्वारा सार्वजनिक संपत्तियों का निजीकरण किया जा रहा है, जबकि लाखों सरकारी पद रिक्त पड़े हैं और उन्हें भरने की कोई ठोस योजना नहीं है। बड़ी संख्या में युवा ठेका प्रणाली के तहत काम करने को मजबूर हैं।
राजेश सिंघवी, माकपा नेता, ने कहा— देश में सरकार नहीं, बल्कि सर्कस चल रहा है। जनता सड़कों पर उतरकर अपने टैक्स के पैसे का हिसाब मांग रही है। जिसे हमने चुना है, उसे जनता को जवाब देना ही होगा। प्रदर्शन के बाद संगठनों के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपते हुए श्रम कानूनों में बदलाव वापस लेने, निजीकरण पर रोक लगाने और रोजगार के स्थायी अवसर उपलब्ध कराने की मांग की।
श्रमिकों की देशव्यापी हड़ताल : उदयपुर में कलेक्ट्री पर जोरदार प्रदर्शन, सरकार पर जनविरोधी नीतियों के आरोप

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