24 News Update उदयपुर। फतेहपुरा-बेदला रोड स्थित मंगल श्री गार्डन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन भावुक माहौल में हुआ, जहां श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। कथा के अंतिम दिन व्यासपीठ से लालसोट के आचार्य विष्णुकान्त शास्त्री ने कृष्ण-सुदामा की मित्रता का मार्मिक वर्णन करते हुए वर्तमान समय की मित्रता पर कटाक्ष किया और कहा कि “आज के युग में सच्ची मित्रता दुर्लभ हो गई है, जहां मित्र ही मित्र को धोखा दे रहा है, वहीं हमें कृष्ण-सुदामा जैसी निस्वार्थ मित्रता से सीख लेने की आवश्यकता है।”
आचार्य शास्त्री ने कथा के दौरान गांगाणी परिवार की अटूट श्रद्धा और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि “ऐसा प्रेम और एकजुटता हर किसी के नसीब में नहीं होती।” उन्होंने सातों दिन की कथा का सार प्रस्तुत करते हुए बताया कि श्रीमद्भागवत श्रवण से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कथा के दौरान कृष्ण-सुदामा प्रसंग की सुंदर झांकी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
कथा आयोजन में श्रीमती उषा गांगाणी ने परिवार सहित मुख्य यजमान के रूप में भागवत की अगुवानी की। समापन अवसर पर उन्होंने आचार्य श्री एवं सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। आयोजन के संयोजक दीपक गुप्ता ने भी सभी सहयोगियों और उपस्थित भक्तों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
समापन के उपरांत रात्रि 8 बजे खाटूश्याम भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें सुप्रसिद्ध भजन गायक अनिल आनन्द शर्मा, केमिता राठौड़, योगेश सैनी और प्रतीक माहेश्वरी ने मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भजनों पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे और आयोजन भक्ति व श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ।
कृष्ण-सुदामा की मित्रता का संदेश, भागवत कथा के समापन पर भावुक हुए श्रद्धालु, खाटूश्याम कीर्तन में गूंजे भक्ति के स्वर, सात दिवसीय आयोजन का हुआ समापन

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