24 News Udpate उदयपुर। उदयपुर के मीरा गर्ल्स कॉलेज में एक सप्ताह से सुलग रहा असंतोष बुधवार को फिर सतह पर आ गया। कॉलेज परिसर में तनाव उस वक्त बढ़ गया, जब कुछ छात्राओं ने मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी। अचानक हुए इस घटनाक्रम से कैंपस का माहौल गर्मा गया और देखते ही देखते कॉलेज गेट के बाहर भीड़ जमा हो गई।
स्थिति की सूचना मिलते ही हाथीपोल थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने छात्राओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब तालाबंदी नहीं खोली गई और हंगामा जारी रहा, तो दो छात्राओं को हिरासत में लिया गया। हालांकि, पुलिस ने उन्हें करीब आधे घंटे बाद पाबंद कर छोड़ दिया।
विवाद की जड़: स्कूटी वितरण कार्यक्रम
कॉलेज में मौजूदा टकराव की शुरुआत कुछ समय पहले हुए स्कूटी वितरण कार्यक्रम से मानी जा रही है। इस कार्यक्रम के दौरान कॉलेज प्रिंसिपल दीपक माहेश्वरी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हुई थी। मामला तूल पकड़ने के बाद शिक्षा विभाग ने हस्तक्षेप किया और प्रिंसिपल माहेश्वरी को एपीओ करते हुए जयपुर मुख्यालय भेज दिया। इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद कॉलेज का छात्र समुदाय दो धड़ों में बंट गया। एक वर्ग माहेश्वरी को निर्दोष बताते हुए उनके समर्थन में उतर आया है, जबकि दूसरा पक्ष शिक्षा विभाग के निर्णय को उचित ठहरा रहा है।
पुलिस-छात्राओं के बीच लंबी बहस
बुधवार को तालाबंदी की सूचना पर पहुंची पुलिस ने गेट पर मौजूद छात्राओं से बातचीत की और ताला खोलने को कहा। काफी देर तक समझाइश और बहस का दौर चलता रहा, लेकिन छात्राएं अपनी मांगों पर अड़ी रहीं। हालात काबू में लाने के लिए पुलिस को दो छात्राओं को हिरासत में लेना पड़ा। हिरासत में ली गई छात्राओं की पहचान दिव्या सालवी और रितिका सालवी के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, दोनों को शांति भंग की आशंका के चलते अस्थायी रूप से थाने ले जाया गया था।
छात्राओं का पक्ष: “हम राजनीति नहीं कर रहे”
हिरासत में ली गई छात्रा दिव्या सालवी ने पुलिस और कॉलेज प्रशासन पर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उनका किसी भी छात्र संगठन या राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। वे केवल कॉलेज के परिणामों में आ रही दिक्कतों और कैंपस के शैक्षणिक माहौल को लेकर अन्य छात्राओं से बातचीत करना चाहती थीं। दिव्या के मुताबिक, मुख्य गेट पर ताला इसलिए लगाया गया ताकि चर्चा पूरी होने से पहले छात्राएं इधर-उधर न हो जाएं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ पूर्व छात्राएं, जो अब कॉलेज से पास आउट हो चुकी हैं, इस मुद्दे को बेवजह राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही हैं।

