24 News Udpate उदयपुर। शहर के गीतांजलि हॉस्पिटल में चिकित्सकीय लापरवाही से हुई मौत के आरोप वाले मामले ने तूल पकड़ लिया है। कोर्ट के आदेश के बाद अब सविना थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। प्रकरण में सिरोही निवासी श्रीमती हेमलता ने पति मनोज कुमार (42) की मौत के लिए डॉ. धवल व्यास और हॉस्पिटल की चिकित्सकीय टीम को जिम्मेदार ठहराया है। परिवाद के अनुसार 28 नवंबर 2025 को पेट दर्द की शिकायत पर मनोज कुमार को गीतांजलि हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने किडनी में पथरी बताकर ऑपरेशन को सामान्य और पूरी तरह सुरक्षित बताया, जिससे परिजन आश्वस्त हो गए। आरोप है कि इसी दौरान जल्दबाजी में खाली कंसेंट पेपर पर हस्ताक्षर करवा लिए गए। इस पूरे मामले में अब ऑपरेशन की प्रक्रिया, दी गई दवाओं की मात्रा, ICU प्रबंधन, रिलीव प्रक्रिया और अस्पताल प्रशासन की भूमिका की गहन जांच की जाएगी। यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित चिकित्सकों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई संभव है।
एफआईआर में सामने आए अतिरिक्त तथ्य
एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया है कि ऑपरेशन के दौरान दी गई “हेवी डोज” एनेस्थीसिया और स्टेंट डालने की प्रक्रिया में कथित लापरवाही से मरीज के शरीर के अंदरूनी अंगों, विशेष रूप से पैंक्रियाज (Pancreas) को क्षति पहुंची। इसी के चलते मरीज को ‘सीवियर एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस’ के साथ मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर की स्थिति बनी। परिवाद में यह भी आरोप है कि उपचार के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने स्थिति की गंभीरता समय पर स्पष्ट नहीं की और परिजनों को वास्तविक स्थिति से अनभिज्ञ रखा। साथ ही एफआईआर में यह तथ्य भी जोड़ा गया है कि जब मरीज की हालत अत्यधिक बिगड़ गई, तब उसे आईसीयू में शिफ्ट किया गया, लेकिन वहां भी उपचार “उपेक्षापूर्ण” और जल्दबाजी में किया गया। परिजनों का यह भी आरोप है कि अस्पताल की ओर से पूरे उपचार का पारदर्शी मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।
ऑपरेशन के दौरान लापरवाही का आरोप
शिकायत में बताया गया कि ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक बेहोशी का इंजेक्शन दिया गया और स्टेंट डालने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई। इसके बाद मरीज की हालत अचानक बिगड़ गई—पेट फूलना, ब्लड प्रेशर गिरना, सांस लेने में दिक्कत और किडनी फेलियर जैसी गंभीर स्थितियां सामने आईं।
मल्टी ऑर्गन फेल्योर हो गया, गलती नहीं स्वीकारी
परिजनों के अनुसार ऑपरेशन के बाद मरीज को ‘सीवियर एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस’ और मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर हो गया। उन्हें ICU में भर्ती करना पड़ा, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। आरोप है कि चिकित्सकों ने उपचार में त्रुटि की बात स्वीकार करने के बावजूद परिजनों पर कार्रवाई नहीं करने का दबाव बनाया।
दबाव में साइन, फिर दूसरे अस्पताल रेफर
एफआईआर में यह भी कहा गया है कि जब परिजन मरीज को अन्य अस्पताल ले जाना चाहते थे, तब अस्पताल प्रशासन ने रिलीव लेटर जारी करने से पहले खाली कागजों पर दबावपूर्वक हस्ताक्षर करवाए। 4 दिसंबर को मरीज को गुजरात के पालनपुर ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने पहले हुए उपचार को लापरवाहीपूर्ण बताया। बाद में अहमदाबाद रेफर किया गया।
12 दिसंबर को मौत, परिवार में मातम
अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में उपचार के दौरान 12 दिसंबर 2025 को मनोज कुमार की मौत हो गई। मृतक की उम्र महज 42 वर्ष थी, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पीड़िता का आरोप है कि घटना के बाद कई बार सविना थाने में रिपोर्ट देने के बावजूद पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की। 22 दिसंबर को डाक के जरिए पुलिस और एसपी को शिकायत भेजी गई, लेकिन तब भी कार्रवाई नहीं हुई।
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मामला
एफआईआर विवरण के अनुसार मामला अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम संख्या-3, उदयपुर के समक्ष प्रस्तुत इस्तगासा के आधार पर दर्ज किया गया। न्यायालय ने धारा 175(3) बीएनएसएस के तहत पुलिस को प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद सविना थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) और 3(5) के तहत मामला पंजीबद्ध कर जांच शुरू की गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार प्रकरण दर्ज कर जांच सहायक उपनिरीक्षक देवेंद्र सिंह को सौंपी गई है।

