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जल जीवन मिशन घोटाला: उदयपुर में अलसुबह दबिश, ACB की कार्रवाई में बड़े अधिकारी गिरफ्तार

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24 News Update उदयपुर। जल जीवन मिशन में सामने आए हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने उदयपुर को केंद्र में रखते हुए बड़ी कार्रवाई की है। ACB की गठित एसआईटी ने मंगलवार अल सुबह उदयपुर सहित जयपुर, बाड़मेर, करौली, दिल्ली और अन्य राज्यों में एक साथ छापेमारी कर 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई प्रकरण संख्या 245/2024 में अनुसंधान के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई।
ACB सूत्रों के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) की परियोजनाओं में फर्जी दस्तावेजों, टेंडर प्रक्रिया में नियमविरुद्ध बदलाव और अधिकारियों–ठेकेदारों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया, जिसकी कड़ियां उदयपुर से जुड़ी परियोजनाओं तक पहुंची हैं।

उदयपुर से जुड़ी परियोजनाएं भी जांच के दायरे में
जांच में सामने आया कि राजस्थान के विभिन्न जिलों में स्वीकृत जल जीवन मिशन की परियोजनाओं—जिनमें उदयपुर क्षेत्र की योजनाएं भी शामिल हैं—में टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित कर अप्रत्याशित रूप से ऊंचे टेंडर प्रीमियम स्वीकृत किए गए। आरोप है कि 50 करोड़ रुपये से अधिक के मेजर प्रोजेक्ट्स में नियमों के विपरीत साइट विजिट प्रमाण-पत्र की बाध्यता जोड़ी गई, जिससे बोलीदाताओं की पहचान उजागर हुई और टेंडर पुलिंग को बढ़ावा मिला।

इन 9 अधिकारियों की गिरफ्तारी
ACB द्वारा गिरफ्तार आरोपियों में— दिनेश गोयल, हाल मुख्य अभियंता (प्रशासन), के. डी. गुप्ता, हाल मुख्य अभियंता (ग्रामीण), सुभांशु दीक्षित, तत्कालीन सचिव RWSSM, हाल अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जयपुर क्षेत्र-द्वितीय, सुशील शर्मा, हाल वित्तीय सलाहकार, अक्षय ऊर्जा, निरिल कुमार, हाल मुख्य अभियंता, चूरू, विशाल सक्सेना, अधिशाषी अभियंता, हाल निलंबित, अरुण श्रीवास्तव, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, हाल सेवानिवृत्त, डी. के. गौड, तत्कालीन मुख्य अभियंता व तकनीकी सदस्य, हाल सेवानिवृत्त, महेंद्र प्रकाश सोनी, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, हाल सेवानिवृत्त शामिल हैं।

फर्जी प्रमाण पत्रों से 960 करोड़ के टेंडर लेने का आरोप
ACB के अनुसार, मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवैल कम्पनी के प्रोपराइटर महेश मित्तल और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवैल कम्पनी के प्रोपराइटर पदमचंद जैन ने IRCON International Limited के फर्जी कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र तैयार किए। इन प्रमाण पत्रों को PHED के उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से टेंडरों में लगाया गया, जिससे दोनों फर्मों ने करीब 960 करोड़ रुपये के टेंडर हासिल किए और करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार किया गया।

SIT का गठन, वरिष्ठ स्तर पर निगरानी
प्रकरण के त्वरित अनुसंधान के लिए पुष्पेंद्र सिंह राठौड़, पुलिस अधीक्षक की अध्यक्षता में SIT का गठन किया गया। जांच राजेश सिंह, महानिरीक्षक पुलिस (द्वितीय) और डॉ. रामेश्वर सिंह, उपमहानिरीक्षक पुलिस (प्रथम) की निकटतम निगरानी में की गई। ACB के अनुसार, अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव के सुपरविजन में आरोपियों से विस्तृत पूछताछ जारी है और उदयपुर से जुड़ी परियोजनाओं के दस्तावेजों की भी गहन जांच की जा रही है।

पहले भी दर्ज हो चुका है मामला
ACB इससे पहले जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार को लेकर प्रकरण संख्या 215/2023 दर्ज कर चुकी है, जिसमें 11 आरोपियों और 2 फर्मों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है।

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