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80 साल पुराने मृत व्यक्ति के नाम पर जैन समाज की ज़मीन की हो गई रजिस्ट्री

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24 News Update भीलवाड़ा। राजस्व रिकॉर्ड की फाइलों से निकलकर एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें 80 वर्ष पहले दिवंगत हो चुके यति के नाम पर न केवल दस्तावेज़ जिंदा कर दिए गए, बल्कि सुवाणा श्वेतांबर जैन समाज ट्रस्ट की बेशकीमती जमीन की बाकायदा रजिस्ट्री भी कर दी गई। मृत व्यक्ति के नाम से फर्जी आधार, पैन कार्ड, फोटो, उम्र और पता तक गढ़कर 80 लाख रुपये का सौदा रच दिया गया—और सिस्टम सब देखता रहा।
मामले का पर्दाफाश किसी जांच एजेंसी ने नहीं, बल्कि संयोग ने किया। ट्रस्ट की जमीन से सटी अपनी खरीदी हुई भूमि का डिमार्केशन करवाते समय एक व्यक्ति को कागज़ों में सटी हुई जमीन किसी और के नाम दर्ज दिखी। यह नाम था—आसींद निवासी मोहम्मद मुन्ना। यहीं से शक की सुई ट्रस्ट भूमि की ओर घूमी और पूरा मामला खुलकर सामने आ गया।
दरअसल, सुवाणा कस्बे में स्थित करीब दो बीघा भूमि वर्षों से सुवाणा श्वेतांबर जैन समाज ट्रस्ट के नाम दर्ज थी। यह भूमि उपासरा के यति श्री केसरी चंद तथा शांतिनाथ जैन मंदिर से संबद्ध थी। ट्रस्ट पदाधिकारी प्रकाश चपलोत को जब यह जानकारी मिली, तो दस्तावेज़ खंगाले गए। नतीजा हैरान करने वाला था—17 अक्टूबर 2025 को यह जमीन मोहम्मद मुन्ना के नाम रजिस्टर्ड पाई गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह कि जिन यति श्री केसरी चंद के नाम पर यह सौदा दिखाया गया, उनकी मृत्यु लगभग 80 वर्ष पहले हो चुकी है। इसके बावजूद उनके नाम से फर्जी आधार और पैन कार्ड बनवाए गए, उम्र घटा-बढ़ाकर दर्ज की गई और फोटो तक जालसाजी से जोड़ी गई। सेल डीड में केसर चंद का उल्लेख भी तथ्यात्मक रूप से गलत पाया गया।
रजिस्ट्री दस्तावेज़ों में मोहम्मद मुन्ना (पिता अब्दुल मजीद) को खरीददार बताया गया है, जबकि रामकरण जाट और मोहम्मद मंसूरी को गवाह बनाया गया। सवाल यह नहीं कि फर्जीवाड़ा हुआ—सवाल यह है कि ट्रस्ट की ऐसी जमीन, जिसे न बेचा जा सकता है और न खरीदा, वह बिना ठोस जांच के रजिस्ट्री की मेज़ तक कैसे पहुंच गई?
मामला सामने आने के बाद शनिवार को जैन समाज के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर व एसपी से मुलाकात कर कड़ी कार्रवाई की मांग की। ट्रस्ट अध्यक्ष नेमकुमार संघवी ने स्पष्ट कहा कि रेवेन्यू विभाग की भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए—क्योंकि बिना मिलीभगत या घोर लापरवाही के यह खेल संभव नहीं।
समाज की ओर से एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए सभी संबंधित दस्तावेज़ भी प्रस्तुत किए गए हैं। साथ ही स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि इस पूरे प्रकरण में शामिल हर व्यक्ति—चाहे वह दलाल हो, गवाह हो या जिम्मेदार अधिकारी—के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी।

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