उदयपुर, 31 अक्टूबर। सौभागपुरा चौराहे के उदघाटन के बाद समाचार माध्यमों, विभिन्न वक्तव्यों एवं सोशल मीडिया पर नामकरण को लेकर चल रहे विवाद पर पूर्व पार्षद डॉ. विजय विप्लवी ने खुला वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि इस विवाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक परमपूज्य माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य श्रीगुरुजी का नाम जोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह श्रीगुरुजी के विचार, सिद्धांत और जीवन-दर्शन के सर्वथा विपरीत है। डॉ. विप्लवी ने कहा कि श्रीगुरुजी एक महान आध्यात्मिक पुरुष थे। प्रसिद्धि से पराङ्मुखता उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषता थी। उन्होंने स्वयं कहा था कि ‘मेरे स्मारक खड़े नहीं करने चाहिए।’ उनके इस कथन का उल्लेख लेखक डॉ. चन्द्रिकाप्रसाद वाजपेयी की पुस्तक ‘अटलबिहारी वाजपेयी : कुछ लेख, कुछ भाषण’ के पृष्ठ 230 पर मिलता है। पुस्तक में ‘राष्ट्रभक्ति का नंदादीप’ शीर्षक से प्रकाशित लेख में पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने पूज्य श्रीगुरुजी को संस्मरणात्मक श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं विचारों का उल्लेख किया है।उन्होंने कहा कि श्रीगुरुजी स्वयं अपने नाम से किसी राजनीतिक अथवा अन्य प्रकार का विवाद खड़ा होना पसंद नहीं करते थे। इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण वर्ष 1965 में उदयपुर में ही देखने को मिला था। उस समय उदयपुर नगर निगम (तत्कालीन सिटी कॉर्पोरेशन) में मदनलाल धुप्पड़ सभापति तथा भानुकुमार शास्त्री उपसभापति थे। दोनों ने नगर निगम की ओर से श्रीगुरुजी के नागरिक अभिनंदन का प्रस्ताव उनके समक्ष रखा। इस पर श्रीगुरुजी ने स्पष्ट कहा कि राजनीतिक आधार पर गठित बोर्डों में दलगत विरोधाभास स्वाभाविक हैं, लेकिन यदि नगर निगम का बोर्ड सर्वसम्मति से नागरिक अभिनंदन का आयोजन करता है तो वे अवश्य आएंगे।डॉ. विप्लवी के अनुसार, इसके बाद बोर्ड की बैठक में कांग्रेस पार्षद मोहम्मद हुसैन हैदरी ने श्रीगुरुजी के नागरिक अभिनंदन का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसी सहमति के पश्चात 1 जून 1965 को सहेलियों की बाड़ी में श्रीगुरुजी का नागरिक अभिनंदन समारोह आयोजित हुआ। यह प्रसंग बताता है कि श्रीगुरुजी व्यक्तिगत सम्मान से अधिक सर्वसम्मति को महत्व देते थे।उन्होंने कहा कि श्रीगुरुजी अपने जीवनकाल में अत्यंत आग्रह करने पर ही अपना छायाचित्र खिंचवाने की अनुमति दी। वे अपने अनुयायियों पर स्वयं से संबंधित कोई कार्य अथवा दायित्व शेष नहीं छोड़ना चाहते थे। इसी भावना के अंतर्गत उन्होंने अपने जीवनकाल में ही अपना श्राद्ध भी कर लिया था। ऐसे ऋषितुल्य व्यक्तित्व का नाम किसी चौराहे के नामकरण से जुड़े विवाद में जोडना उचित नहीं है। संबंधित लोगों को किसी प्रकार की मांग अथवा विवाद खड़ा करने से पहले श्रीगुरुजी के जीवन-दर्शन, विचारों और सिद्धांतों को समझना चाहिए।ठाकुर अमरचंद बड़वा के नामकरण का निर्णय पहले ही हो चुका है सौभागपुरा सर्कल के नामकरण के संबंध में डॉ. विप्लवी ने कहा कि इस विषय में पूर्व में ही निर्णय लिया जा चुका है। दिनांक 5 जून 2018 को नगर विकास प्रन्यास की तत्कालीन अध्यक्ष रवीन्द्र श्रीमाली की अध्यक्षता में आयोजित बोर्ड बैठक में इस चौराहे का नामकरण मेवाड़ के इतिहास में विशिष्ट स्थान रखने वाले ठाकुर अमरचंद बड़वा के नाम पर करने का निर्णय हुआ था।ठाकुर अमरचंद बड़वा मेवाड़ के महाराणा काल में वर्ष 1751 से 1778 तक प्रधानमंत्री रहे और उन्होंने चार महाराणाओं के साथ इस महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन किया। उनके कार्यकाल में उदयपुर में शहरकोट एवं अमरकुंड जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्य हुए। उनके ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए ही चौराहे का नाम उनके नाम पर रखने का निर्णय किया गया था। बड़वा स्मृति संस्थान की ओर से वहां प्रतिवर्ष आयोजन भी किए जाते रहे हैं।डॉ. विप्लवी ने कहा कि जब किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व के नाम पर सक्षम प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में पूर्व में ही निर्णय हो चुका है, तब व्यक्तिगत आग्रह अथवा अहम् के कारण पूज्य श्रीगुरुजी के नाम को विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है। इससे न केवल एक महान आध्यात्मिक व्यक्तित्व के विचारों की अवहेलना होती है, बल्कि मेवाड़ के इतिहास और पूर्व में लिए गए संस्थागत निर्णय की भी अनदेखी होती है।उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से आग्रह किया कि इस विषय को प्रतिष्ठा अथवा व्यक्तिगत आग्रह का प्रश्न बनाने के बजाय इतिहास, परंपरा, पूर्व निर्णय और श्रीगुरुजी के जीवन-दर्शन के आलोक में देखा जाए। श्रीगुरुजी का नाम विवाद में नहीं, बल्कि उनके विचारों और आदर्शों को आत्मसात करने में सम्मानित होना चाहिए। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation आठ साल तक पुलिस को देते रहे चकमा, राजलक्ष्मी बैंक घोटाले के दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार, फर्जी पट्टों और दस्तावेजों से बनाए थे 13 लोन खाते, दोनों पर था 10-10 हजार रुपये का इनाम गणगौर घाट पर युवक ने झील में लगाई छलांग, सिविल डिफेंस जवान गौरव बागोरा ने जान पर खेलकर बचाया