विश्वविख्यात वास्तुविद मंडन की स्मृति में उदयपुर में आकार ले रहा है ‘आर्किटेक्ट्स टॉवर’, आर्किटेक्चर, साइंस और संस्कृति का अद्भुत संगम बनेगा नई पहचान एक विचार… जो इतिहास में दर्ज होगा 24 News update उदयपुर, 6 जुलाई। सभ्यताओं की पहचान केवल उनके शासकों से नहीं होती, बल्कि उन शिल्पियों और आर्किटेक्ट्स से भी होती है जिन्होंने नगर बसाए, दुर्ग गढ़े, मंदिरों को आकार दिया और संस्कृति को पत्थरों पर अमर कर दिया। विडंबना यह रही कि जिन क्रिएटिव माइंड्स ने दुनिया को पहचान दी, उन्हें सार्वजनिक स्मारकों में शायद ही कभी स्थान मिला। अब झीलों की नगरी उदयपुर इस ऐतिहासिक कमी को दूर करने की दिशा में एक अनूठी पहल कर रही है। शोभागपुरा स्थित जे.के. सर्किल पर लगभग 35 फीट ऊँचा ‘आर्किटेक्ट्स टॉवर’ आकार ले रहा है। यह केवल एक आर्किटेक्चरल स्ट्रक्चर नहीं, बल्कि भारतीय आर्किटेक्चर, शिल्प और क्रिएटिव परंपरा के प्रति समाज की सामूहिक कृतज्ञता का प्रतीक होगा। यह महान आर्किटेक्ट मंडन को समर्पित रहेगा और पूरे आर्किटेक्ट एवं डिज़ाइनर समुदाय को सार्वजनिक सम्मान देने का माध्यम बनेगा। प्रोजेक्ट डायरेक्टर एवं आर्किटेक्ट सुनील लड्ढा ने बताया कि 7 जुलाई से इस कार्य का शुभारंभ होगा और शीघ्र ही यह टॉवर आमजन को समर्पित किया जाएगा। भगवान विश्वकर्मा से शुरू हुई सूत्रधार परंपरा भारतीय शिल्प एवं आर्किटेक्चर परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का प्रथम सूत्रधार माना गया है। निर्माण के सूत्रों को धारण करने वाले शिल्पियों को ‘सूत्रधार’ कहा गया, जो समय के साथ सुथार और सुतार जैसे शब्दों में परिवर्तित हुआ। मेवाड़ के शिलालेखों, प्रशस्तियों और ऐतिहासिक ग्रंथों में सूत्रधार शब्द सम्मान और गौरव का प्रतीक रहा है। मेवाड़ के महान सूत्रधार मंडन को समर्पित होगी यह विरासत पंद्रहवीं शताब्दी में मंडन ने मेवाड़ के यशस्वी शासक महाराणा कुंभा के प्रधान आर्किटेक्ट एवं सूत्रधार के रूप में भारतीय आर्किटेक्चर को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। उनके मार्गदर्शन में विश्वप्रसिद्ध कुंभलगढ़ दुर्ग का निर्माण हुआ, जिसकी लगभग 36 किलोमीटर लंबी परकोटा दीवार विश्व की सबसे लंबी किलेबंदियों में गिनी जाती है। कुंभलगढ़ के भीतर स्थित कटारगढ़ तथा चित्तौड़गढ़ दुर्ग के अनेक महलों, मंदिरों और अन्य आर्किटेक्चरल कार्यों में भी उनके योगदान का उल्लेख मिलता है। मंडन केवल कुशल शिल्पकार ही नहीं, बल्कि भारतीय वास्तुशास्त्र के महान आचार्य भी थे। उन्होंने प्रासादमंडन, राजवल्लभ, रूपमंडन और वास्तुमंडन जैसे कालजयी ग्रंथों की रचना कर अर्बन प्लानिंग, बिल्डिंग डिज़ाइन, मूर्तिकला और आर्किटेक्चर के सिद्धांतों को व्यवस्थित स्वरूप दिया। उनके ये ग्रंथ आज भी भारत और विदेशों में आर्किटेक्चर स्टडी का महत्वपूर्ण संदर्भ माने जाते हैं। ऐसे महान सूत्रधार की स्मृति में निर्मित हो रहा यह टॉवर भारतीय आर्किटेक्चर परंपरा को समर्पित एक जीवंत श्रद्धांजलि होगा। उदयपुर के आर्किटेक्ट सुनील लड्ढा की दूरदर्शी संकल्पना इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की संकल्पना उदयपुर के ख्यातनाम आर्किटेक्ट सुनील लड्ढा ने की है। उनका मानना है कि दुनिया में असंख्य स्मारक राजाओं, वीरों और ऐतिहासिक घटनाओं की स्मृति में बने हैं, लेकिन उन आर्किटेक्ट्स के सम्मान में सार्वजनिक स्मारक नहीं हैं जिन्होंने इन सभ्यताओं और स्मारकों की कल्पना की। इसी सोच से “आर्किटेक्ट्स टॉवर” का विचार जन्मा। उनकी दृष्टि में यह केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देने का माध्यम है कि किसी भी शहर की वास्तविक पहचान उसके आर्किटेक्ट्स, डिज़ाइनर्स और क्रिएटिव माइंड्स से बनती है। साइंस, संस्कृति और आधुनिक आर्किटेक्चर का संगम इस प्रोजेक्ट की टेक्निकल सहयोगी युवा आर्किटेक्ट प्रियंका कोठारी ने बताया कि टॉवर की सबसे विशिष्ट पहचान इसमें स्थापित होने वाला वर्टिकल सन डायल (ऊर्ध्वाधर सूर्य घड़ी) होगा। यह प्रकृति, समय और साइंस के शाश्वत संबंध को जनसामान्य के सामने जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगा। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक आर्किटेक्चर का यह अनूठा संगम इसे केवल दर्शनीय ही नहीं, बल्कि एक एजुकेशनल लैंडमार्क भी बनाएगा। उदयपुर की नई पहचान बनने की ओर झीलों और महलों के शहर उदयपुर को यह टॉवर एक नई समकालीन पहचान देगा। दिन में अपनी विशिष्ट आर्किटेक्चरल डिज़ाइन और रात में आकर्षक लाइटिंग के कारण यह पर्यटकों, आर्किटेक्ट्स, इंजीनियर्स, स्टूडेंट्स, रिसर्चर्स और डेवलपर्स के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगा। भविष्य में यह भारत के आर्किटेक्चर टूरिज्म का भी एक महत्वपूर्ण लैंडमार्क बन सकता है। क्रिएटिविटी को समर्पित एक कालजयी संदेश ‘आर्किटेक्ट्स टॉवर’ केवल कंक्रीट और स्टील का ढांचा नहीं होगा, बल्कि यह उन सभी शिल्पियों, सूत्रधारों और आर्किटेक्ट्स के प्रति समाज का सार्वजनिक प्रणाम होगा, जिन्होंने अपनी क्रिएटिविटी और विज़न से सभ्यताओं को आकार दिया। भगवान विश्वकर्मा से लेकर महान सूत्रधार मंडन और आधुनिक युग के आर्किटेक्ट्स तक चली आ रही सृजनशील परंपरा को यह स्मारक नई पीढ़ियों तक पहुँचाएगा। उदयपुर का यह प्रयास केवल एक शहर का सौंदर्य बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह संदेश देगा कि सभ्यताओं का निर्माण केवल सत्ता नहीं करती, बल्कि उन्हें अमर बनाने का कार्य क्रिएटिव मस्तिष्क और दूरदर्शी आर्किटेक्ट्स करते हैं। यही संदेश “आर्किटेक्ट्स टॉवर” को भारत ही नहीं, बल्कि विश्व आर्किटेक्चर जगत में भी एक विशिष्ट पहचान दिलाने की क्षमता रखता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. 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