
24 News Update उदयपुर। राजस्थान कृषि महाविद्यालय (आरसीए), उदयपुर में मंगलवार को नवनिर्मित परीक्षा सभागार का भव्य उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक महामहिम श्री गुलाब चंद कटारिया ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि भारत की बढ़ती जनसंख्या और बेरोजगारी का समाधान भी इसी जमीन से—कृषि क्षेत्र से—निकलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि खेती के साथ जुड़े सहायक व्यवसायों को अपनाना ही भविष्य का रास्ता है।
खेती के साथ व्यवसाय जोड़ें, नहीं तो मैनपावर कहां खपाएंगे?
कटारिया ने कहा कि भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और हमारी जनसंख्या 140 करोड़ को पार कर चुकी है। “इतने बड़े मैनपावर को कहां खपाएंगे? इसका हल हमें कृषि के साथ चलने वाले व्यवसायों में ढूंढना होगा,” उन्होंने कहा। उन्होंने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे छोटी जोत वाले किसानों के लिए व्यवहारिक मॉडल विकसित करें, जिससे वे आंवला, नींबू, आम, फूलों की खेती या बागवानी से आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने आदिवासी अंचलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां किसान मक्का बोने के बाद मजदूरी के लिए पलायन कर जाते हैं और बाद में फसल पशु खा जाते हैं या हरे भुट्टे चोरी हो जाते हैं। इस स्थिति में बदलाव आवश्यक है।
कृषि वैज्ञानिकों की उपलब्धियां और आह्वान
कटारिया ने कहा कि देश को खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का श्रेय हमारे कृषि वैज्ञानिकों को जाता है। पहले हम अमेरिका से आयातित गेहूं पर निर्भर थे, लेकिन आज हम न केवल अपने लिए पर्याप्त अनाज उगा रहे हैं, बल्कि अन्य देशों को भी निर्यात कर रहे हैं।
उन्होंने समारोह में उपस्थित कृषि विद्यार्थियों से कहा, “भारत तुम्हें देख रहा है। तुम में वह सामर्थ्य है जो भारत को तीसरी नहीं, पहली अर्थव्यवस्था बना सकता है।” विशिष्ट अतिथि डॉ. अजीत कुमार कर्नाटक ने बताया कि कटारिया ने अपने विधायक मद से 20 लाख रुपये इस परीक्षा सभागार के लिए दिए थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण परीक्षा हॉल की भारी कमी थी, लेकिन अब यह समस्या दूर हो जाएगी। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय को 58 पेटेंट में से 41 पेटेंट प्राप्त हुए, जो अनुसंधान और नवाचार में एमपीयूएटी की सशक्त उपस्थिति को दर्शाते हैं।
प्रसिद्ध किस्में व अनुबंध
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने प्रताप संकर मक्का-6 किस्म विकसित की है जिसकी औसत उपज 60-65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है, जो पूर्व की तुलना में दुगनी है। छह कंपनियों के साथ इसका बीज उत्पादन कर किसानों को उपलब्ध कराने के लिए एमओयू किए जा चुके हैं। अपने संबोधन में कटारिया ने उदयपुर के ऐतिहासिक जल संरक्षण मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि यहां महाराणाओं की दूरदर्शिता से 200 मीटर पाल बांधकर एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील बनाई गई। उन्होंने 1965 की देवास परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना पूरा होने पर बीसलपुर तक पानी पहुंचाने की क्षमता रखती है। उन्होंने गोगुंदा क्षेत्र में जल संकट का भी जिक्र किया, जहां सर्वाधिक वर्षा के बावजूद लोग पानी के लिए तरसते हैं। समारोह में राजस्थान कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आर.बी. दुबे, विश्वविद्यालय प्रबंध समिति सदस्य, डीन व डायरेक्टर्स डॉ. अरविंद वर्मा, डॉ. आर.एल. सोनी, डॉ. सुनील जोशी, डॉ. आर.ए. कौशिक, डॉ. कविता जोशी, डॉ. एस. रमेश बाबू, बड़ी संख्या में विद्यार्थी व अधिकारी उपस्थित थे। संचालन डॉ. कपिल देव आमेटा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एस.एस. लखावत ने दिया।
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