24 News Update जयपुर। सुशासन अगर फाइलों से निकलकर ज़मीन पर उतरता है, तो उसकी पहचान समय से होती है—और शुक्रवार को वही तस्वीर साफ दिखाई दी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संपर्क पोर्टल पर दर्ज एक परिवेदना पर खुद संज्ञान लिया, परिवादी से सीधा संवाद किया और डूंगरपुर जिला प्रशासन ने महज़ दो घंटे में समाधान देकर यह जता दिया कि इच्छाशक्ति हो तो व्यवस्था दौड़ती है। मामला डूंगरपुर जिले के साबला तहसील स्थित बोडीगाम छोटा गांव का था। यहां के निवासी जितेंद्र सिंह ने अपने बच्चों—संयम और क्रिया—के मूल निवास और जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। सात दिन बीतने के बाद भी काम आगे नहीं बढ़ा तो उन्होंने संपर्क पोर्टल का दरवाज़ा खटखटाया। बात सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंची—और वहीं से काम ने रफ्तार पकड़ ली।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने परिवादी से फोन पर बातचीत कर स्थिति जानी। उसी क्षण मुख्यमंत्री कार्यालय से डूंगरपुर कलेक्टर अंकित कुमार सिंह को अवगत कराया गया। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और कागज़ों की धीमी चाल को पीछे छोड़ते हुए दो घंटे के भीतर दोनों प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए।
जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से सूचना मिलने के बाद प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई कर प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। परिवादी जितेंद्र सिंह ने राहत मिलने पर राज्य सरकार और जिला प्रशासन का आभार जताया।
सीएम है तो मुमकिन है : दो घंटे, एक फोन कॉल और सिस्टम दौड़ा सरपट

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