24 न्यूज अपडेट, जयपुर। जिस राज्य की जेल से बार बार मोबाइल बरामद होते हों वहां की कानून व्यवस्था का अंदाजा लगाना आसान नहीं हैं। जेलों से रैकेट चल रहे हैं, जेलों से वसूलियों के फोन जा रहे हे। अपराधियों के नेटवर्क चल रहे हैं। और हमारे होनहार कर्णधार जिम्मेदार नींद में सोए हुए हैं। बार बार मोबाइल मिलना अब पूरे सिस्टम और कानून का मजाक बन चुका है। अब तो न्यायालय संज्ञान लें तभी कुछ हो सकता है। क्योंकि बिना जेलकर्मियों की मिलीभगत से ऐसा होना असंभव है। अगर अपराधी ही पुलिस से मिलकर खेल खेलेंगे तो जनता की सुरक्षा का क्या होगा???
जयपुर सेंट्रल जेल में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। जेल में चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान बैरक नंबर-2 और 3 से चार मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। इनके साथ चार्जर, बैटरी और ईयरफोन भी मिले हैं।
तीन बंदियों के नाम आए सामने
जेल प्रशासन की पूछताछ में पता चला कि ये मोबाइल बंदी मनोज विजय, विजय पाल और महेंद्र सिंह इस्तेमाल कर रहे थे। जांच के बाद जेल प्रशासन ने बरामद मोबाइल और अन्य उपकरण लालकोठी पुलिस के सुपुर्द कर दिए।
जेल प्रशासन की ओर से दर्ज कराई गई थ्प्त्
इस मामले में जेल प्रशासन ने तीनों बंदियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट लालकोठी थाने में दर्ज कराई है। ैभ्व् प्रकाशराम बिश्नोई ने बताया कि जेल में लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि मोबाइल जैसी प्रतिबंधित वस्तुएं अंदर न पहुंच सकें।
सुरक्षा पर उठे सवाल
बार-बार जेल में मोबाइल मिलने की घटनाओं से यह साफ है कि अंदर तक प्रतिबंधित सामान पहुंचाने की व्यवस्था में कहीं न कहीं चूक हो रही है। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि मोबाइल जेल तक पहुंचे कैसे।

