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वंदना से विनय आता है शांति के लिए विनय की महिमा है- संत तिलकराम महाराज

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24 News Update सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। नगर के आसपुर मार्ग लोहारिया तालाब के सामने स्थित कान्हडदास दास धाम बड़ा रामद्वारा में चातुर्मास में शाहपुरा धाम के रामस्नेही संत तिलकराम ने सत्संग में बताया कि वंदना से विनय आता है शांति के लिए विनय की महिमा है ।
संत ने कहा विनीत शिष्य अशांत गुरु को भी शांत बना देता है। क्रोध पर विजय के लिए मोन, शांत रहना एवं क्षमा भाव रहे । मन के भावों को सदा भगवान भक्ति में लगाए रखना ही पूजा है । सम्मानजनक वाणी से शांति रहती है । वर्तमान में सहनशीलता की कमी है इसलिए वाणी व्यवहार में सावधानी बहुत जरूरी है । जब तक मन की विरोध की गांठे नहीं खुलेंगी तब तक धर्मसाधना पूर्ण नहीं होगी । संत ने कहा की पूजा हमेशा विवेकपूर्वक और धुले हुए द्रव्य से करनी चाहिए । बिना शुद्ध किया द्रव्य भगवान को चढ़ाने से दरिद्रता आती है । मंदिर की पवित्रता रखनी चाहिए यहां लड़ाई- झगड़े और राग- दॄेष महापाप का कारण बनते हैं । मंदिर में किया हर सेवा -कार्य को भी भगवान की पूजा माना जाना चाहिए । सेवा -भाव, उत्साह और भक्ति से किया गया हर कार्य भी पूजा है और वही भव- रोग का नाश करता है । कर्म ,उपासना ,मन और ज्ञान यह साधना के सोपान है । यह मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं । कर्म से हृदय शुद्ध होता है । उपासना से एकाग्रता मिलती है । मन का निग्रह साधक को स्थिर करता है । अंतत ज्ञान से आत्मसाक्षात्कार संभव होता है यही यात्रा जीवत्व से आत्मबोध की ओर ले जाती है । संत ने कहा कि जो पुरुष कुल, रूप, जाति, बुद्धि ,तप ,शास्त्र और शील आदि के विषय में तनिक भी घमंड नहीं करता ,वही परमात्मा की प्राप्ति का अधिकारी होता है । अहंकार का जन्मदाता अज्ञान है और जैसे ही ज्ञान का प्रकाश आता है, अहंकार का अंधकार समाप्त हो जाता है । जैसे कुएं से पानी भरने वाली बाल्टी तभी भरती है जब वह झुकती है । जीवन की विपत्तियां भी विनम्र और सहज स्वभाव वाले व्यक्तियों को शीघ्र ही पार कर देती है । जीवन में कुछ भी मिले अहंकार में मत अकडो । सरलता, सहजता और मधुरता ही सच्चे धर्म की पहचान है । प्रवक्ता बलदेव सोमपुरा ने बताया कि संत प्रसाद दामोदर दलाल परिवार का रहा सत्संग में नाथू परमार ,विष्णु भावसार के अतिरिक्त प्रेमलता सुथार, कड़ुव, मोती ,गमीरी परमार, भानु ,पुष्पा सेवक सहित रामस्नेही भक्त उपस्थित रहे।

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