24 न्यूज अपडेट, सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। नगर के आसपुर मार्ग लोहारिया तालाब के सामने स्थित कान्हडदास दास धाम बड़ा रामद्वारा में चातुर्मास कर रहे रामस्नेही संत तिलकराम ने सत्संग में बताया कि कलयुग में सिर्फ ईश्वर का नाम ही संसार से भवसागर पार करा सकता है व शिवजी के ग्रंथ मोक्ष की और ले जाने वाले सेतु है।
संत ने हका इस कलयुग में शरीर व मन को हरण लेता है जीवों का भरण- पोषण मुश्किल होता है व्यापार ढप्प पड जाता, राजा का राज समाप्त हो जाता जागीरदारी नहीं रह पाती सेठ कंगाल हो जाते हैं जाने वालों से मोह है, मेरा है तब तक दुःख है । नारी सिर्फ धन देखती है परिवार का प्रेम नहीं । मीठा खाने से बीमारी हो जाती है पर मीठा बोलने से मन प्रसन्न हो जाता है सुख तो संतोष में है। झूठ, कपट, पाप सिर्फ पेट भरने के लिए मनुष्य करता है। संत ने श्रावण मास पर बताया कि मनुष्य को अपने प्रत्येक प्रिय वस्तु का त्याग कर देना चाहिए जिससे उसका मोह समाप्त हो जाए । पुष्प- फल धान्य बिल पत्रो से शिवजी की लक्ष पूजा करनी चाहिए एक करोड़ शिवलिंग बनाने चाहिए एवं लक्ष्मी तथा शांति चाहने वाले मनुष्य को बेल पत्रो आयु की कामना करने वालों को चंपा के एक लाख पुष्प, विद्या चाहने वाले को मल्लिका अथवा चमेली के पुष्पों से भगवान की पूजा करनी चाहिए । शिवजी के ग्रंथ मोक्ष की और ले जाने वाले सेतु है जो कलयुग के पथ भ्रष्ट मानव को उदॢार का मार्ग दिखाता है । यह जीवन के प्रत्येक संघर्ष का समाधान है । इसमें निहित ज्ञान व्यक्ति को आत्मबोध ,सद्कर्म ,और शिव भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता है । ग्रंथ भगवान शिव की अनंत करुणा और वैराग्य की शक्ति का प्रतिनिधित्व करते है । कथाओं में छिपे संदेश हमें सद्भाव, संयम और सेवा भाव से युक्त जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं । आध्यात्मिक जागरण का माध्यम बनाकर ग्रंथ जीवन के अंधकार को दूर करने वाला प्रकाश है । मनुष्य स्वयं ही हीन भावना के कारण अहंकार करता है, जिससे उसमें बीमारियां पनपने लगती है । जीवन में अहंकार मुक्त होकर सरलता पूर्वक अपने कर्तव्य का निर्वहन के लिए अपने आप को तैयार करने का प्रयास करना चाहिए । हमें विनय गुण से संपन्न होना चाहिए । धन ,बल, ज्ञान व तप युक्त अहंकारी व्यक्तियों का सदैव नाश होता है । विनय गुण आत्मा का स्वभाव है ,जो बाहर से या ब्राह््र साधनों से प्राप्त नहीं होते । भगवान शिव स्वयं तो पूज्य है ही लेकिन उन्होंने प्रत्येक उस प्राणी को भी पूज्य बना दिया जो उनकी शरण में आ गया । शिव आश्रय लेने पर वक्र चंद्र अर्थात वो चंद्रमा जिसमे अनेक विकृतियों, अनेक दोष है पर वो भी वंदनीय बन गए । जिसे मनुष्यो का जन्मजात शत्रु माना जाता है वही सर्प जब भगवान शिव की शरण लेकर उनके गले का हार बन जाता है तो फिर पूजनीय भी बन जाता है । इसलिए संसार में महान वही है जो प्रत्येक व्यक्ति को गले लगाता है । जीवन इस प्रकार का हो कि आपसे मिलने के बाद सामने वाले का हृदय उत्साह ,प्रसन्नता और आनंद से परिपूर्ण हो जाए ।. प्रवक्ता बलदेव सोमपुरा ने बताया संत प्रसाद दीपक तंबोली परिवार का रहा सत्संग में नाथू परमार ,विष्णु भासरिया, जनक पंचाल, सुरेंद्र शर्मा, प्रभुराम बुनकर,उषा मेहता, सविता भावसार, मंजुला भावसार, सपना सेवक, चाहना सेवक, संगीता सोनी, अनीता सुथार, प्रेमलता सुथार सहित रामस्नेही भक्त उपस्थित रहे।
ईश्वर का नाम सुमिरण करने से भवसार पार कर सकते-संत तिलकराम महाराज

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