जयपुर आरटीओ धर्मेंद्र चौधरी का पुतला दहन
उदयपुर। शहर में ट्रैवल कारोबारियों का अनिश्चितकालीन चक्का जाम गुरुवार को तीसरे दिन और अधिक तीखा हो गया। उदयपुर के उदियापोल चौराहे पर सैकड़ों की संख्या में जुटे ट्रैवल ऑपरेटरों और बस संचालकों ने परिवहन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और विरोध स्वरूप जयपुर के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी धर्मेंद्र चौधरी का पुतला फूंका।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परिवहन विभाग की नई नीतियों और कथित मनमानी कार्यशैली ने ट्रैवल व्यवसाय को गहरे संकट में धकेल दिया है। ट्रैवल एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि निजी बस संचालकों के खिलाफ “चयनात्मक कार्रवाई” कर उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर किया जा रहा है, जिससे न केवल व्यापार प्रभावित हो रहा है बल्कि आम यात्रियों को भी असुविधा झेलनी पड़ रही है।
“व्यवसाय पर सीधा प्रहार”
उदयपुर ट्रैवल एसोसिएशन के अध्यक्ष पारस सिंघवी ने कहा कि विभागीय अधिकारियों की हठधर्मिता से पूरे प्रदेश में ट्रैवल व्यवसाय ठप होने की कगार पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर संवाद के बजाय दमनात्मक रवैया अपनाया जा रहा है। “हमारी मांगें पूरी तरह जायज हैं, लेकिन उन्हें अनसुना किया जा रहा है। सरकार को स्वयं हस्तक्षेप करना चाहिए,” उन्होंने कहा।
सिंघवी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से अपील की कि वे मामले का संज्ञान लेकर ट्रैवल व्यापारियों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें और परिवहन व्यवस्था को पारदर्शी व जनहितैषी बनाएं।
उदियापोल बना विरोध का केंद्र
गुरुवार को हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ट्रेवल ऑपरेटर, बस मालिक और संबंधित व्यवसायी शामिल हुए। उदियापोल क्षेत्र में नारेबाजी और प्रदर्शन के बीच पुलिस प्रशासन भी सतर्क रहा। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि उन्होंने यातायात को बाधित नहीं होने दिया और आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से संचालित किया।
आर-पार की चेतावनी
एसोसिएशन प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि जब तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
ये रहे मौजूद
प्रदर्शन में शंकर भाटिया, दिनेश काबरा, अमित यादव, ऋषभ जैन, अब्दुल सलाम खान, राकेश, विपिन शर्मा, सुंदर लाल, किरण कुमार, गणेश सहित अनेक पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।
तीसरे दिन भी जारी इस चक्का जाम ने साफ संकेत दे दिया है कि ट्रैवल व्यवसायी अब पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। अब निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वह इस टकराव को संवाद से सुलझाती है या आंदोलन और तेज होता है।

