24 News update चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ पुलिस ने नकली नोट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोपियों ने ChatGPT ऐप और सोशल मीडिया से नकली नोट तैयार करने की तकनीक सीखी और आवश्यक सामग्री अमेजन और फ्लिपकार्ट से ऑनलाइन मंगाकर किराए के कमरे में फर्जी नोट बनाने का काम शुरू किया।
विजयपुर थानाधिकारी प्रभुसिंह चुंडावत ने बताया कि 17 सितंबर को कोतवाली थाना क्षेत्र से आसिफ अली (27) पुत्र नूर मोहम्मद, आदिल खान (27) पुत्र अब्दुल गफूर खान निवासी सारोला, झालावाड़ और शहनवाज खान (27) पुत्र मंसूर अहमद निवासी कैथून, कोटा को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से कुल लगभग 15 हजार रुपए के नकली 500-500 रुपए के नोट बरामद हुए, जिनमें से आसिफ के पास 13, आदिल के पास 6 और शहनवाज के पास 11 नोट थे।
किराए के कमरे में चल रहा था फर्जी धंधा
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने झालावाड़ में अपने ही गांव सारोला के मोहल्ले में किराए का कमरा लिया था। मकान मालिक को बताया गया कि वे कंप्यूटर का ऑनलाइन काम करते हैं, जबकि हकीकत में उसी कमरे में नकली नोट तैयार किए जा रहे थे। पुलिस ने मौके पर प्रिंटर, विशेष प्रकार का पेपर, इंक, केमिकल, हरी टेप, सांचा (फॉरमेट) और वाटरमार्क तैयार करने का लकड़ी का फ्रेम बरामद किया।
नकली नोट का बाजार में वितरण
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि नकली नोट चलाने के लिए वे शहर के पावटा चौक और आसपास के इलाकों को चुनते थे। वे विशेषकर रेहड़ी-ठेले वाले, सब्जी विक्रेता, बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे लोगों को निशाना बनाते थे। नोट चलाने के लिए फर्जी नंबर प्लेट वाली बाइक का उपयोग किया जाता था। इसके अलावा, चित्तौड़गढ़ में भी उन्होंने एक और किराए का कमरा ले रखा था।
ऑनलाइन खरीदी और ChatGPT से सीख
अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने प्रिंटर, पेपर और अन्य जरूरी सामान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अमेजन और फ्लिपकार्ट से खरीदा। ChatGPT और सोशल मीडिया के माध्यम से नकली नोट बनाने की तकनीक सीखने के बाद वे अपने तैयार नोटों को बाजार में चलाते थे।
फिलहाल तीनों आरोपियों से विजयपुर थाना पुलिस पूछताछ कर रही है और मामले की जांच जारी है।

