24 News Update चंडीगढ़। पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नकली नोटों की छपाई और सप्लाई करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से नकली करेंसी बनाने की तकनीक सीखकर प्रिंटर के जरिए 100, 200 और 500 रुपए के जाली नोट तैयार कर रहे थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि अब तक यह गिरोह एक करोड़ रुपए से अधिक के फर्जी नोट छाप चुका है।
पुलिस के मुताबिक पकड़े गए आरोपियों में दो उत्तर प्रदेश, जबकि एक-एक जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और हरियाणा का रहने वाला है। गिरफ्तारी के बाद इनके पास से कुल 1,777 नकली नोट बरामद किए गए, जिनकी फेस वैल्यू करीब 7.17 लाख रुपए है। इसके अलावा लैपटॉप, टैबलेट, प्रिंटिंग इंक, विशेष पेपर शीट और एक कार भी जब्त की गई है।
पांच राज्यों में फैला था नेटवर्क, रिमांड पर पूछताछ जारी
क्राइम ब्रांच ने आरोपियों को दो दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह का नेटवर्क दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर तक फैला हुआ था। पुलिस पूरे सप्लाई चैन और संभावित ग्राहकों की तलाश में जुटी है।
ये हैं गिरफ्तार आरोपी
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में अविनाश कुमार (निवासी हक्कल वार्ड नंबर-5, अलसियाटा, जिला जम्मू), सत्यम विश्वकर्मा (महावीर एन्क्लेव पार्ट-2, नई दिल्ली), संदीप (सतनाली रोड, महेंद्रगढ़, हरियाणा), अब्दुल्ला (बेहट) और शहजाद (नकुड़, जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश) शामिल हैं। पांचों के खिलाफ क्राइम ब्रांच थाने में बीएनएस की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
ऐसे खुली नकली नोट फैक्ट्री की परतें
19 दिसंबर को क्राइम ब्रांच की टीम सेक्टर-43 आईएसबीटी के पास गश्त पर थी। इसी दौरान सूचना मिली कि राजस्थान पुलिस का वांछित आरोपी अविनाश कुमार सेक्टर-52 के कजहेड़ी गांव स्थित एक पीजी में रह रहा है। छापेमारी के दौरान अविनाश को पकड़ लिया गया और उसके बैग से 500, 200 और 50 रुपए के नकली नोट बरामद हुए। इसके बाद उसी पीजी से उसके साथी सत्यम विश्वकर्मा को भी गिरफ्तार किया गया। कमरे की तलाशी में एक लाख रुपए से अधिक के जाली नोट और करेंसी छापने का पूरा सामान मिला। अगले दिन सत्यम की निशानदेही पर कजहेड़ी इलाके में खड़ी सफेद ब्रेजा कार की तलाशी ली गई, जहां से 4.76 लाख रुपए के नकली नोट बरामद किए गए। इसी कड़ी में संदीप, अब्दुल्ला और शहजाद को भी दबोच लिया गया।
सोशल मीडिया से सीखा ‘धंधा’, पहले ट्रायल फिर बड़े पैमाने पर छपाई
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह का मास्टरमाइंड अविनाश कुमार सोशल मीडिया पर नकली नोट बनाने से जुड़े वीडियो देखता था। उसने इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर उपलब्ध कंटेंट से नोट डिजाइन, प्रिंटिंग और सप्लाई के तरीके सीखे। पहले कुछ नोट छापकर बाजार में चलाए गए, जब कहीं शक नहीं हुआ तो बड़े पैमाने पर छपाई शुरू कर दी गई। नोटों की सप्लाई में दिक्कत आई तो अविनाश ने अपने दोस्तों को इस काम में शामिल कर लिया। सभी ने मिलकर पहले लखनऊ को टारगेट किया, जहां नकली नोट आसानी से खप गए। इसके बाद परमानेंट ग्राहक बनाए गए और 1:4 के अनुपात में सौदे होने लगे, यानी एक लाख रुपए असली के बदले चार लाख रुपए के नकली नोट दिए जाते थे।
चंडीगढ़ में एंट्री करते ही पुलिस ने कसा शिकंजा
लखनऊ के बाद गिरोह ने चंडीगढ़ में नकली नोटों की सप्लाई शुरू की, लेकिन मुखबिर तंत्र के जरिए पुलिस को भनक लग गई। जाल बिछाकर क्राइम ब्रांच ने पूरे गिरोह को दबोच लिया। जांच में यह भी सामने आया है कि नकली नोटों की छपाई जम्मू-कश्मीर में की जाती थी और फिर अलग-अलग तरीकों से सप्लाई की जाती थी—कभी कूरियर के जरिए तो कभी हाथों-हाथ।
तीन महीने पहले भी सामने आया था बड़ा नेटवर्क
गौरतलब है कि तीन महीने पहले भी चंडीगढ़ क्राइम ब्रांच ने नकली नोटों के एक मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उस केस में खुलासा हुआ था कि नोटों में इस्तेमाल होने वाली विशेष तार चीन से मंगाई जाती थी। उस रैकेट का मास्टरमाइंड अब भी फरार है और पुलिस को आशंका है कि वह गुजरात से नेटवर्क संचालित कर रहा है। फिलहाल, चंडीगढ़ पुलिस इस ताजा मामले में गिरोह के बाकी लिंक और संभावित अंतरराज्यीय कनेक्शन खंगालने में जुटी हुई है।

