प्रकाशनार्थ विशेष आलेख: डॉ. कमलेश शर्मा 24 News Update गुजरात के प्रसिद्ध देवी तीर्थ पावागढ़ की तरह ही आस्था, भूगोल और लोकमान्यताओं से ओतप्रोत एक दिव्य शक्तिपीठ राजस्थान के वागड़ अंचल में भी स्थित है। बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से लगभग 22 किलोमीटर दूर, बड़ोदिया कस्बे के समीप अरावली पर्वतशृंखला की एक विशाल पर्वतचोटी पर विराजमान नंदनी माता तीर्थ को श्रद्धालु स्नेहपूर्वक “वागड़ का पावागढ़” कहते हैं। निम्बाहेड़ा–दोहद नेशनल हाईवे के समीप सड़क किनारे छितराई अरावली पर्वतमालाओं के मध्य स्थित यह देवीधाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत विशिष्ट स्थान रखता है। भौगोलिक तथ्यों के अनुसार यह मंदिर समुद्रतल से 1384 फीट (422 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है, जहां से दूर-दूर तक फैला वागड़ अंचल एक दिव्य दृश्य प्रस्तुत करता है। दुर्गम नहीं, सहज होती आस्था की चढ़ाई :विशाल पर्वत पर स्थित होने के बावजूद नंदनी माता धाम अब श्रद्धालुओं के लिए दुर्गम नहीं रहा। देवीतीर्थ नंदनी माता विकास समिति, चोखला की पहल और जनसहयोग से पहाड़ की तलहटी से ही सुगम मार्ग विकसित किए गए हैं।पूर्व दिशा में बड़ोदिया गांव की ओर तथा पश्चिम दिशा में चोखला की ओर लगभग 500-500 सीढ़ियों का निर्माण किया गया है, जिससे श्रद्धालु सहजता से मां के दरबार तक पहुंच पाते हैं।इसी सामूहिक प्रयास का परिणाम है कि हाल ही में देवी के नवीन भव्य मंदिर का निर्माण पूर्ण हुआ, जिसने धाम की गरिमा को और अधिक बढ़ा दिया है। श्वेत पाषाण प्रतिमा और द्वापर युग की स्मृति :नंदनी माता तीर्थ के मुख्य मंदिर में सिंहवाहिनी, अष्टभुजाधारी मां नंदनी की श्वेत वर्णा पाषाण प्रतिमा स्थापित है। आदिम संस्कृति से जुड़े वागड़ अंचल में मां नंदनी के प्रति गहन आस्था व्याप्त है। लोकमान्यता के अनुसार मां नंदनी वही देवी हैं, जो द्वापर युग में यशोदा के गर्भ से उत्पन्न हुई थीं। कंस ने देवकी की आठवीं संतान समझकर जिस कन्या को मारने का प्रयास किया, वह देवी उसके हाथों से मुक्त होकर आकाश मार्ग से उड़ती हुई इस पर्वत पर आकर स्थापित हुईं।इस मान्यता का उल्लेख दुर्गा सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय के 42वें श्लोक में भी मिलता है— “या नंद गोप गृहे जाता, यशोदा गर्भ संभवा।ततस्तो नाशयिष्यामि, विंध्याचल निवासिनी॥” यह श्लोक मां नंदनी की दिव्यता और उनके विंध्याचल-निवास की पुष्टि करता है। नवरात्रि : जब पर्वत बनता है भक्ति का दीप नंदनी माता धाम पर प्रतिवर्ष चारों नवरात्रों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों का आयोजन होता है। नवरात्रि के दौरान पहाड़ी पर स्थित मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है, जो रात्रि में दूर से ही श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।मान्यता है कि मां नंदनी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत शीघ्र पूर्ण होती है। इसी विश्वास के चलते नवरात्रि और अवकाश के दिनों में यहां श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन बना रहता है। संगीत रचती चट्टानें और रहस्यमयी ध्वनियां धाम के समीप पर्वत पर कुछ ऐसी चट्टानें भी हैं, जिन पर पत्थर से आघात करने पर संगीत जैसी मधुर ध्वनि उत्पन्न होती है। यह प्राकृतिक रहस्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है। लोककथाएं, परंपराएं और जीवंत विश्वास नंदनी माता धाम से जुड़ी लोककथाएं आज भी क्षेत्र में जीवित हैं। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान मां नंदनी बड़ोदिया के गरबा मंडलों में गरबा खेलने आई थीं। किंतु कुम्हार प्रजाति के एक व्यक्ति द्वारा देवी की पहचान जानने के प्रयास से मां के श्राप के कारण आज भी बड़ोदिया कस्बे में कुम्हार जाति के परिवार नहीं बसे हुए माने जाते हैं।इसी प्रकार होली से जुड़ी एक परंपरा भी मां नंदनी से संबंधित है। मान्यता के अनुसार नंदनी माता की होली प्रज्वलित होने के बाद ही बड़ोदिया और आसपास के सैकड़ों गांवों में होली जलाई जाती है। यह परंपरा आज भी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाई जाती है। आस्था का शिखर : वागड़ का पावागढ़ नंदनी माता धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि वागड़ की आत्मा, इतिहास और लोकसंस्कृति का जीवंत प्रतीक है। यहां जहां एक ओर द्वापर युग की स्मृतियां हैं, वहीं दूसरी ओर आधुनिक समय में जनसहयोग से विकसित होता यह तीर्थ आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था और संस्कार का केंद्र बना हुआ है। इसी कारण श्रद्धालु इसे गर्व से कहते हैं—“यह है वागड़ का पावागढ़।” Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation महिला को मिला जीवनदान, उमर फ़ारुख़ फ़ाउंडेशन के डोनर ने किया रक्तदान जिला स्तरीय अंडर-15 कुश्ती प्रतियोगिता संपन्न, उदयपुर टीम घोषित