24 न्यूज अपडेट, भोपाल। “हमने 11 बार इलेक्ट्रिक शॉक दिया, हर तीसरे मिनट CPR दिया, फिर भी धड़कन नहीं लौटी। लेकिन हमने हार नहीं मानी… क्योंकि हमें पता था कि लगातार 40-45 मिनट CPR देने से भी किसी की जान बच सकती है।”
यह कहना है कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुनील चौधरी का, जिन्होंने 22 जुलाई को नागदा के रूपेटा गांव निवासी सनी गहलोत को 40 मिनट बाद मौत के मुंह से वापस लाने में सफलता पाई।
बीपी चेक के दौरान गिर पड़े सनी, पल्स हो गई जीरो
सनी सुबह से सीने में दर्द की शिकायत के चलते पहले एक लोकल डॉक्टर के पास गए, ECG करवाया, पर राहत नहीं मिली। दोपहर में वे डॉ. सुनील के क्लिनिक पहुंचे। बीपी चेक करवाते समय ही अचानक बेहोश हो गए, पल्स शून्य हो गई।
डॉ. सुनील ने तुरंत CPR शुरू किया और ICU तक ले जाया गया। रास्ते भर CPR जारी रहा।
100+ बार प्रति मिनट CPR, 11 शॉक के बाद भी ना लौटी सांस
ICU पहुंचते ही 360 जूल का डीसी शॉक और इमरजेंसी इंजेक्शन दिया गया। हर 3 मिनट में CPR दोहराया गया। एक मिनट में 100 से ज्यादा बार CPR दिया गया।
11 बार डीसी शॉक देने के बाद भी दिल ने प्रतिक्रिया नहीं दी।
12वां शॉक बना जीवन की डोर
लगातार प्रयासों के बाद 12वें शॉक पर हार्टबीट लौटी, हालांकि बीपी अब भी शून्य था। इसके बाद तुरंत बीपी बढ़ाने की दवाएं और हार्ट एक्टिवेटिंग इंजेक्शन दिए गए।
स्टडी का भरोसा बना उम्मीद की किरण
डॉ. सुनील ने बताया कि कई डॉक्टर 15-20 मिनट बाद CPR बंद कर देते हैं, लेकिन एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल स्टडी के मुताबिक लगातार प्रयासों से 40-45 मिनट बाद भी हार्ट रिवाइव हो सकता है।
उन्होंने कहा – “अगर 2-3 मिनट भी देरी होती है तो ब्रेन डेड हो सकता है। इसलिए हमने तुरंत प्रतिक्रिया दी और मरीज को वापस लाया।”
जीवनशैली ही दिल की बीमारी की जड़
डॉ. चौधरी ने बताया कि तेज मसालेदार, तेल-घी से भरपूर भोजन, फास्ट फूड, और व्यायाम की कमी आज दिल की बीमारियों के सबसे बड़े कारण हैं।
सीने में दर्द, घबराहट, पसीना और सांस फूलना – ये सभी हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को हल्के में न लें।
उन्होंने कहा – “एक्सरसाइज, जॉगिंग, साइकलिंग को जीवनशैली में शामिल करना और शुगर कंट्रोल में रखना आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है।”
40 मिनट तक मौत से लड़ाई… 12वें शॉक पर लौटी धड़कनः नागदा के मरीज को कार्डियक अरेस्ट के बाद डॉक्टर ने दी नई ज़िंदगी

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