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केवड़े की नाल क्षेत्र के किसान मशरूम उत्पादन में नहीं हैं पीछे : डॉ. मीना

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24 News Update उदयपुर। सलूम्बर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आयवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत अनुसूचित जाति के किसानों को मशरूम की वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के अधीन महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर में संचालित अखिल भारतीय समन्वित मशरूम अनुसंधान परियोजना द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना (SCSP) के अंतर्गत यह एक दिवसीय प्रशिक्षण ग्राम पंचायत धावड़िया (महुवाड़ा), पंचायत समिति जयसमंद, जिला सलूम्बर में आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में परियोजना प्रभारी प्रोफेसर नारायण लाल मीना ने किसानों को मशरूम के पोषणीय एवं औषधीय गुणों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मशरूम रक्तचाप नियंत्रित करने, मधुमेह प्रबंधन, हृदय रोगों के जोखिम को कम करने के साथ-साथ कैंसर एवं अल्जाइमर प्रतिरोधी गुणों से भरपूर होता है तथा इसमें एंटीऑक्सीडेंट तत्व भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
उन्होंने ढींगरी, बटन एवं दूधछाता मशरूम की वैज्ञानिक खेती की तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि केवड़े की नाल क्षेत्र की जलवायु मशरूम उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल है और यहां के अनुसूचित जाति के किसान इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की पूरी क्षमता रखते हैं।
कार्यक्रम में अविनाश कुमार नागदा एवं किशन सिंह राजपूत ने मशरूम उत्पादन से संबंधित प्रायोगिक जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षण में हीरा लाल मीणा (निरीक्षक, सहकारी समिति उदयपुर), भावना पटेल (कृषि पर्यवेक्षक), बालचंद मीणा (प्रशासक), मांगी लाल बुनकर एवं निर्मला बुनकर (सामाजिक कार्यकर्ता) सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण में पंचायत समिति जयसमंद क्षेत्र के आसपास के गांवों से कुल 30 महिला एवं पुरुष किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रशिक्षणार्थियों को मशरूम खेती से संबंधित आवश्यक सामग्री का वितरण किया गया। यह जानकारी डॉ. जी. एल. मीना, मीडिया प्रकोष्ठ एवं जनसंपर्क अधिकारी, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर ने दी।

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