24 News Update उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशालय के अंतर्गत संचालित अखिल भारतीय समन्वित सिंचाई जल प्रबंधन अनुसंधान परियोजना के तहत कृषि विज्ञान केन्द्र, वल्लभनगर में “कृषि में जल उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक दिवसीय किसान प्रशिक्षण” कार्यक्रम आयोजित किया गया।
परियोजना प्रभारी डॉ. के.के. यादव ने किसानों को भूजल बैंक बनाने के लिए भूजल पुनर्भरण स्थानों की पहचान करने तथा विभिन्न पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण की जानकारी दी। उन्होंने उपलब्ध सिंचाई जल के बहु-स्तरीय उपयोग और जल की गुणवत्ता के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
डॉ. मनी राम, प्रभारी कृषि विज्ञान केन्द्र, चित्तौड़गढ़ ने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग की सलाह देते हुए कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के तरीकों की जानकारी दी।
डॉ. मनजीत सिंह, प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय, उदयपुर ने भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के रखरखाव, उनमें जमा सिल्ट निकालने की प्रक्रिया तथा फव्वारा और ड्रिप पद्धति से सिंचाई कर जल बचत करने के उपाय विस्तार से बताए। उन्होंने किसानों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से फसल उत्पादन बढ़ाने के तरीकों से भी अवगत कराया।
कार्यक्रम में उद्यानिकी के प्रोफेसर एवं क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान डॉ. श्रीधर सिंह लखावत ने सिंचाई जल प्रबंधन परियोजना के शोध कार्यों की सराहना करते हुए मेवाड़ क्षेत्र में किसानों की जोत और जल उपलब्धता के अनुसार सिंचाई प्रबंधन पर अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने ड्रिप फर्टिगेशन पद्धति से फलोत्पादन की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला और बताया कि मेवाड़ में फलोत्पादन के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं।
इस दौरान वल्लभनगर कृषि अनुसंधान उपकेंद्र के तकनीकी सहायक धनपाल कोठरी ने किसानों को रबी और खरीफ मौसम में बीजोत्पादन तथा फसलों की वैज्ञानिक खेती के नवीनतम तरीकों की जानकारी दी।
कृषि में जल उत्पादकता बढ़ाने के लिए किसान प्रशिक्षण आयोजित

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