24 News Update उदयपुर। सुपारी एवं मसाला विकास निदेशालय, कालीकट (केरल) के सहयोग से कृषि विज्ञान केन्द्र, चित्तौड़गढ़ में बीजीय मसालों की उन्नत उत्पादन तकनीक विषय पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को बीजीय मसालों की आधुनिक खेती, पोषक तत्व प्रबंधन और मूल्य संवर्धन की तकनीकों से अवगत कराना था। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. रतन लाल सोलंकी ने किसानों को बीजीय मसालों की खेती की उपयोगिता बताते हुए कहा कि इन फसलों को अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व, आवश्यक पोषक तत्वों की भूमिका, पौधों में पोषक तत्वों की कमी के लक्षण और उनके समाधान पर विस्तार से जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. अभय दशोरा, सहायक आचार्य एवं परियोजना प्रभारी, राजस्थान कृषि महाविद्यालय उदयपुर ने परियोजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बीजीय मसालों की उन्नत किस्मों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। वहीं सह-परियोजना प्रभारी डॉ. बी.जी. छीपा ने मसालों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की संभावनाओं पर चर्चा की।
सह-परियोजना प्रभारी डॉ. उर्मिला ने मृदा स्वास्थ्य की जांच के लिए मिट्टी के नमूने लेने की वैज्ञानिक विधि समझाई तथा मृदा उर्वरता बनाए रखने के लिए जैविक खादों के उपयोग पर जोर दिया। तकनीकी सहायक संजय कुमार धाकड़ ने मेथी की उन्नत खेती के विभिन्न पहलुओं पर किसानों को व्यावहारिक जानकारी दी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 40 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर प्रतिभागी किसानों को विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषि कैलेंडर भी वितरित किए गए। कार्यक्रम के अंत में डॉ. उर्मिला ने सभी प्रतिभागियों और अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
बीजीय मसालों की उन्नत उत्पादन तकनीक पर कृषक प्रशिक्षण आयोजित

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