24 News Update उदयपुर। उदयपुर जिले के ऋषभदेव थाना क्षेत्र में हिरासत के दौरान एक ज्वेलर की मौत ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है व आक्रोष की लहर है। 55 वर्षीय सुरेश पंचाल की मौत के बाद परिजनों और समाज के लोगों ने पुलिस पर कस्टडी में हत्या जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। क्या यह महज संयोग है या फिर पुलिस कस्टडी में हुए गंभीर टॉर्चर का नतीजा? सवाल कई हैं, लेकिन जवाब केवल फौरी कार्रवाई के बाद अब भी अधूरे हैं। आपको बता दें कि डूंगरपुर जिले के बिछीवाड़ा निवासी सुरेश पंचाल को सोमवार दोपहर ऋषभदेव पुलिस पूछताछ के लिए थाने लाई थी। आरोप था कि चोरी का सामान खरीदा है। शाम होते-होते खबर आई कि थाने में तबीयत बिगड़ गई और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। लेकिन परिजन इसे महज तबीयत बिगड़ना नहीं मान रहे वे इसे हिरासत में हत्या होना बता रहे हैं। मृतक के बेटे हिमांशु पंचाल ने आरोप लगाया कि उनके पिता को पहले उदयपुर के गोवर्धन विलास थाना ले गए, जहां डराया और धमकाया गया। इसके बाद ऋषभदेव लाया गया। “पिता बिल्कुल स्वस्थ थे, अचानक उनकी मौत कैसे हो सकती है? साफ है कि पुलिस की प्रताड़ना ने उन्हें मार डाला। अब स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसपी योगेश गोयल मौके पर पहुंचे और चार पुलिसकर्मियों को तत्काल सस्पेंड कर दिया। उन्होंने कहा कि परिजनों की रिपोर्ट पर जांच शुरू कर दी गई है और एडिशनल एसपी रैंक के अधिकारी से जांच कराई जा रही है। साथ ही करप्शन के अलग आरोपों की भी जांच होगी।
समाज और व्यापारियों का फूटा गुस्सा
मौत की खबर फैलते ही बिछीवाड़ा, ऋषभदेव और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। देर रात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और थाने के बाहर जोरदार विरोध हुआ। सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष यशवंत आंचलिया ने मीडिया से कहा, “पुलिस लंबे समय से व्यापारियों को बिना कारण प्रताड़ित कर रही है। एसपी ने खुद कहा था कि व्यापारियों से पूछताछ से पहले सर्राफा संघ को जानकारी दी जाए। लेकिन पुलिस मनमानी कर रही है। अब यह मौत इस लापरवाही की परिणति है।”
मुआवजा और नौकरी की मांग
मंगलवार सुबह ऋषभदेव कस्बे के पंचाल समाज के नोहरा (बाड़ा) में प्रशासन और समाज के लोगों के बीच बैठक हुई। परिजनों ने निष्पक्ष जांच, आर्थिक मुआवजा, और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। बैठक में एडिशनल एसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा, एसडीएम अंजना सुखवाल, और तहसीलदार वीरेंद्र राठौड़ मौजूद रहे।
अब सवाल यह उठ रहे हैं कि पूछताछ के नाम पर पुलिस को कहां तक छूट दी जा सकती है? क्या नियमों को ताक पर रखकर हिरासत में टॉर्चर अब भी जारी है? ज्वेलर दोषी भी था, तो क्या पुलिस को कानून हाथ में लेने का अधिकार है? लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों पर सीधा सवाल है। यदि दोषी पुलिसकर्मियों को कड़ी सजा नहीं दी गई, तो यह परंपरा बन जाएगी। सीबीआई या न्यायिक जांच की मांग भी उठाई जा रही है ताकि सच्चाई सामने आए और कोई और सुरेश पंचाल पुलिस हिरासत में न मरे।
थाने में ज्वेलर की मौत मामले को परिजनों ने बताया हत्या, चार पुलिसकर्मी सस्पेंड, पुलिस पर टॉर्चर सहित अन्य गंभीर आरोप, कस्टडी में मौत आखिर कब तक??? क्या मिल पाएगा परिवार को न्याय??

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