24 News Update उदयपुर . झीलों की नगरी उदयपुर की एक चिकित्सक ने आधुनिक शादियों की चकाचौंध से दूर आध्यात्मिकता की एक नई मिसाल पेश की। उदयपुर निवासी डॉ. ऋषिता और अहमदाबाद निवासी प्रीत ने विश्व के सबसे बड़े ध्यान केंद्र ‘कान्हा शांतिवनम’ में हार्टफुलनेस के वैश्विक मार्गदर्शक पूज्य ‘दाजी’ के पावन सानिध्य में शुक्रवार को एक-दूसरे का हाथ थामकर जीवन की नई पारी की शुरुआत की।
आध्यात्मिक रीति-रिवाजों से संपन्न हुईं रस्में
विवाह की रस्में पूर्णतः आध्यात्मिक और सादगीपूर्ण रहीं। समारोह के दौरान पूज्य ‘दाजी’ ने नव-युगल को वरमाला भेंट की, जिसे उन्होंने एक-दूसरे को पहनाया। इसके पश्चात अंगूठी पहनाने की रस्म संपन्न हुई, जिसमें पहले दूल्हे ने दुल्हन को और फिर दुल्हन ने दूल्हे को रिंग पहनाई। धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए दूल्हे ने दुल्हन को मंगलसूत्र पहनाया और मांग में सिंदूर भरा। पूज्य दाजी द्वारा दिए गए विशेष प्रसाद को नव-दंपती ने एक-दूसरे को खिलाया, जिसके बाद दाजी ने स्वयं दोनों का हस्तमेलाप करवाकर उन्हें अपना आशीर्वाद और भेंट प्रदान की। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी मंच के नीचे बैठे माता-पिता, परिवारजन और रिश्तेदार बने। विवाह की रस्में आडंबरों से पूरी तरह मुक्त रहीं। प्री-वेडिंग शूट, घोड़ी और भव्य संगीत समारोह जैसे आधुनिक ट्रेंड्स से दूर रहकर इस जोड़े ने प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति के बीच विवाह किया। दुल्हन डॉ. ऋषिता गुजराती पारंपरिक लाल रंग के जोड़े में और दूल्हे प्रीत क्रीम रंग की शेरवानी में बेहद सौम्य नजर आ रहे थे।
उच्च शिक्षित और सेवाभावी परिवार
दुल्हन डॉ. ऋषिता, जो एमबीबीएस के बाद पीडियाट्रिक (बाल रोग) में एमडी कर रही हैं, के संस्कारों की जड़ें उनके परिवार में हैं। उनके पिता मीरा गर्ल्स कॉलेज से प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हैं और वर्तमान में योग, अध्यात्म व विभिन्न हीलिंग थेरेपी के माध्यम से निःशुल्क समाज सेवा कर रहे हैं।
उदयपुर और राजस्थान से जुटे श्रद्धालु
उदयपुर केंद्र समन्वयक डॉ. राकेश दशोरा और प्रदेश प्रभारी विकास मोघे के नेतृत्व में राजस्थान से हजारों श्रद्धालु इस गौरवपूर्ण पल के साक्षी बनने हैदराबाद पहुंचे। जो श्रद्धालु व्यक्तिगत रूप से नहीं पहुंच पाए, उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से इस विवाह समारोह का सीधा प्रसारण देखा।
वैश्विक समागम के बीच संपन्न हुआ विवाह
यह विवाह पूज्य श्री बाबूजी महाराज की 127वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय आध्यात्मिक उत्सव (भंडारे) के समापन पर संपन्न हुआ। उत्सव के दौरान भारत के तिरंगे सहित 160 देशों के ध्वज ध्यान केंद्र के उत्तर स्थित प्रवेश द्वार पर लगाए गए थे, जो वहां उपस्थित वैश्विक प्रतिनिधियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।

