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जनता के पैसों से बनेगा लोकतंत्र का मजाक : चुनाव में मास्टरजी खाएंगे बेसन चक्की, वीआईपी को मिलेगी फ्री शूगर काजू कतली!!!

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24 News update उदयपुर। अगर आप सोचते हैं कि लोकतंत्र केवल मतदाता का उत्सव है तो आप महामूर्ख है। यह तो वीआईपी का उत्सव है जिसमें जनता के पैसों से वीआईपी ऐसे आनंद उठाएंगे जो ईवीएम माथे पर ढोकर चलने वाले मास्टरजी को भी नहीं मिलेंगे। मुफत का चंदन, घिसते रहो मेरे नंदन। यह खबर पढ़कर आपके होश फाख्ता हो जाएंगे कि कहां तो उदयपुर में हम उदयपुर फाइल्स की वीडियो की चर्चा में उलझे पड़े हैं और कहां वीआईपी प्रशासन अपने चुनावी आनंद का इंतजाम करने वाले टेण्डर करने में मशगूल है।

हमारी नजर उदयपुर जिला प्रशासन की ओर से चुनावों के लिए मांगे गए एक 60 लाख के टेंडर पर पड़ी तो हम चौंक गए। विश्वास ही नहीं हुआ कि यह सब कागजों में चोरी छिपे चल रहा है। दो साल में होने वाले चुनावों के लिए 60 लाख का खाने का टेण्डर और उसमें भी वीआईपी कल्चर। बहुत नाइंसाफी हो रही है।

एक बार जनता से तो पूछ लेते कि आपके पैसों से हम शूगर फ्री काजू कतली खाना चाहते हैं, वीआईपी नाश्ता और शाही चाय का आनंद उठाना चाहते हैं, आपको मंजूर है क्या??? हम याने कि जनता आपकी इस करतूत पर आपको लानत भेजती और कहती कि या तो सबको वीआईपी बना दो या फिर आप भी वही साधारण भोजन करो जो आप अपनी कार्मिक कर्मठ सेना को करवा रहे हो। गजब बेइज्जती है टीचर्स और मतदान में लगे कार्मिकों की। एक ही वेन्यू पर वीआईपी साहब मजा ले रहे होंगे अलग नाश्ते और खाने का, और अन्य साधारण को मिलेगा चलताउ मेन्यू वाला खाना।

ये टेण्डर डाक्यूमेंट बकायदा जिला कलेक्टर उदयपुर की सील से जारी हुआ है याने कि कलेक्टर साहब को भी पता है कि 2 हजार वीआईपी को चुनाव में कैसे शाही जमीण जिमाना है। पंगत अलग, सोच अलग और तरीका अलग। लगता है अंग्रेजों के जमाने का असर ब्यूरोक्रेसी की सोच से गया नहीं है।

लोकतंत्र के सबसे पवित्र पर्व के सिपहसालार, रक्षक वे शिक्षक और कर्मचारी हैं जो दूरदराज़ के पहाड़ी गांवों तक ईवीएम मशीनें माथे पर रखकर पहुंचते हैं, रातें स्कूलों में काटते हैं और सुबह से शाम तक कतारों को संभालते हैं। दूसरी ओर वही चुनावी तंत्र है, जहां कुछ विशेष वीआईपी हैं जो वाहनों में घूम कर व्यवस्थाएं देखते हैं। निर्देश देते हैं। उनके लिए अलग थाली, अलग कप, अलग मिठाई और अलग इंतज़ाम तय होना गंभीर सवाल उठाता है कि यही है—क्या मतदान केंद्र लोकतंत्र का मंच है या वीआईपी संस्कृति के दर्शन स्थल?

असली सवाल: लोकतंत्र में फर्क क्यों?

मतदान केंद्र पर तैनात शिक्षक—जो अपने नियमित कार्य से अलग जिम्मेदारी निभाते हैं— कई बार बिना वाहन, बिना विशेष सुविधा के दूरस्थ इलाकों तक पहुंचते हैं। ईवीएम मशीनें उठाकर पहाड़ी रास्तों से गुजरना, देर रात तक गिनती, और सुबह फिर वापसी—यह उनका कर्तव्य है। दूसरी ओर, गाड़ियों के काफिलों में आने वाले वीआईपी मेहमानों के लिए अलग चाय, अलग कप, अलग मिठाई और अलग मेन्यू।

जनता का पैसा, किसके लिए?

इन व्यवस्थाओं का खर्च अंततः सरकारी खजाने से—यानी जनता के टैक्स से—आता है। सवाल यह नहीं कि भोजन क्यों दिया जा रहा है; सवाल यह है कि क्या मतदान प्रक्रिया में शामिल सभी लोग समान हैं या कुछ के लिए विशेषाधिकार सुरक्षित हैं? या तो सबको वीआईपी खाना खिलाओ या फिर सबको एक पंगत में बिठा कर भोजन करवाओ। यदि नहीं तो किसी को मत करवाओ। यह दूज परांत तो किसी हाल में नहीं चलने वाली है। जबकि होना तो उल्टा चाहिए। शिक्षक व कर्मचारी असली राजा और वीआईपी हैं। उनके हिस्से काजू कतली आनी चाहिए और अफसर अगर अपनी एसी कमरों से निकल कर बेसन चक्की खा लेगा तो उसका हाजमा खराब होने वाला नहीं है।

📦 सामान्य भोजन व्यवस्था: संख्या ज्यादा, मेन्यू सीमित

🔹 1. सामान्य भोजन पैकेट – 10,500 पैकेट

प्रति पैकेट:

🔹 2. उन्नत भोजन पैकेट – 16,000 पैकेट

प्रति पैकेट:

👉 कुल सामान्य श्रेणी: 26,500 भोजन पैकेट

यह भोजन पैकिंग (डिस्पोजेबल/फोइल) में उपलब्ध कराया जाएगा।


🍽️ VIP भोजन व्यवस्था: संख्या कम, वैभव अधिक

🔹 VIP भोजन – 2,000 प्लेट

प्रति प्लेट:

👉 स्वरूप: केटरिंग/सर्विस आधारित प्लेट


☕ नाश्ते में भी साफ अंतर

🔹 मतदान दल/सामान्य व्यवस्था:

🔹 VIP नाश्ता – 2,000 प्लेट:


📊 तुलनात्मक विश्लेषण

तत्वसामान्यVIP
परोसने का तरीकापैकेटसर्विस प्लेट
रोटीसाधारणबटर तवा
सब्जीएकपनीर + अतिरिक्त
मिठाई100 ग्राम देशी घी50 ग्राम काजू/बादाम, शुगर फ्री
चाय75 मि.ली.125 मि.ली., सिरेमिक कप
सलाद/रायतानहींहाँ
प्रस्तुतिकार्यात्मकहोटलनुमा

🔹 1. संरचना (Structure)

बिंदुसामान्य भोजन पैकेटVIP भोजन प्लेट
स्वरूपपैक्ड (डिस्पोजेबल/फोइल)केटरिंग/प्लेट सर्विस
मात्रा10,500 + 16,000 पैकेट2,000 प्लेट
परोसने का तरीकासाधारण पैकेटसर्विस आधारित, सजावटी

🔹 2. रोटी/पूड़ी

👉 फर्क: VIP थाली में “बटर तवा रोटी” — यानी अतिरिक्त समृद्धि।


🔹 3. सब्जी

👉 फर्क: सामान्य में साधारण सब्जी; VIP में पनीर + अतिरिक्त सब्जी।


🔹 4. दाल

👉 दाल सभी में है, लेकिन VIP में यह समृद्ध थाली का हिस्सा है।


🔹 5. चावल

👉 नाम का अंतर ही स्तर दर्शाता है—“मटर पुलाव” बनाम “शाही पुलाव”।


🔹 6. मिठाई

👉 फर्क: सामान्य में मात्रा अधिक, VIP में प्रीमियम ड्राईफ्रूट आधारित और “शुगर फ्री” विकल्प।


🔹 7. अतिरिक्त आइटम

👉 VIP थाली में होटलनुमा विविधता।


नाश्ते में भी अंतर

सामान्य मतदान दल:

VIP:

👉 यहां केवल मात्रा नहीं, प्रस्तुति और गुणवत्ता में भी स्पष्ट अंतर।

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