24 News Update उदयपुर। राजस्थान में विभिन्न सरकारी विभागों में वर्षों से संविदा और अनुबंध पर कार्यरत कार्मिकों को लेकर एक बार फिर स्थायीकरण की मांग मुखर हुई है। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत संगठन ने बुधवार को अतिरिक्त जिला कलेक्टर जितेंद्र ओझा के माध्यम से मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार के नाम ज्ञापन सौंपते हुए संविदा व्यवस्था को समाप्त कर नियमित भर्ती प्रक्रिया लागू करने की मांग की।
संगठन का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा बेरोजगार युवाओं को अनुबंध या संविदा के आधार पर नियुक्त कर उनसे पूर्ण सरकारी कार्य लिया जा रहा है, लेकिन इसके बदले मिलने वाला कम वेतन उनके और उनके परिवारों के जीवन-यापन के लिए अपर्याप्त है। इससे न केवल आर्थिक असुरक्षा बढ़ रही है, बल्कि यह श्रम शोषण की श्रेणी में भी आता है।
ग्राहक पंचायत संगठन के जिला मंत्री नारायण पंचोली ने बताया कि ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 का उल्लेख करते हुए शोषण से मुक्ति और “समान काम—समान वेतन” के सिद्धांत को लागू करने की मांग की गई है। संगठन का तर्क है कि जब संविदा कार्मिक नियमित कर्मचारियों के समान जिम्मेदारी निभा रहे हैं, तो वेतन और सेवा शर्तों में भेद अनुचित है।
ज्ञापन में यह भी रेखांकित किया गया कि देश के कई राज्यों ने संविदा कार्मिकों को स्थायी करते हुए संविदा भर्ती व्यवस्था को समाप्त कर दिया है और नियमित भर्तियों के स्पष्ट नियम बनाए हैं। राजस्थान में भी इसी तरह की नीति अपनाने की मांग की गई है, ताकि युवाओं को रोजगार की स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा मिल सके। इस अवसर पर संगठन के प्रांत संगठन मंत्री राकेश पालीवाल, जिला अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा, महिला अध्यक्ष पूर्णिमा बोकड़िया सहित करन सिंह कटारिया, फतहलाल पारिक, संगीता जैन, राजू कुंवर चौहान, सुनीता जोशी, रमेश जोशी, नरपत सिंह कुमावत, नरोत्तम गौड़, अनिल टांक, राजकुमार शर्मा, मांगीलाल भोई सहित कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। संगठन ने यह भी जानकारी दी कि ग्राहक पंचायत के पखवाड़े कार्यक्रम का समापन बुधवार दोपहर फतह स्कूल में किया जाएगा, जिसमें खाद्य निरीक्षक अशोक शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
संविदा कार्मिकों के स्थायीकरण की मांग तेज, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन

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