24 News Update भीलवाड़ा, 9 मई। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में बीमा क्लेम हासिल करने के लिए मौत को हादसे का रूप देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि एक युवक की मौत के बाद उसके शव को बिजली का करंट देकर अंगुलियां जलाई गईं, ताकि इसे खेत में करंट लगने से हुई दुर्घटना साबित किया जा सके। मामले में पुलिस ने चार संदिग्धों को हिरासत में लिया है और एक संगठित बीमा गिरोह के सक्रिय होने की आशंका जताई है।
राजस्थान पुलिस के अनुसार मृतक दीपक (36) गुजरात के अहमदाबाद जिले के नरोदा क्षेत्र का निवासी था। उसकी मां चंपाबेन ने पुलिस को बताया कि कुछ लोग इलाज कराने के बहाने दीपक को गुजरात से राजस्थान लेकर आए थे। रास्ते में वे लोग मांडल क्षेत्र के मालोला गांव में एक मकान पर रुके, जहां देर रात दीपक की मौत हो गई।
परिजनों के अनुसार मौत के बाद साथ आए लोगों ने शव को कमरे में ले जाकर पैर के अंगूठे और हाथ की अंगुलियों को जला दिया। इसके बाद उसे करंट लगने का मामला बताते हुए अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में दावा किया गया कि दीपक खेत में काम करते समय बिजली की चपेट में आ गया था।
डॉक्टर को हुआ शक, खुला पूरा खेल
रोहित सहरावत ने जब शव का परीक्षण किया तो उन्हें करंट से मौत की कहानी संदिग्ध लगी। शरीर पर इलेक्ट्रोड के निशान और जलने के पैटर्न सामान्य बिजली हादसे से मेल नहीं खा रहे थे। डॉक्टर ने तत्काल पुलिस को सूचना दी।
जांच शुरू होने पर पुलिस को पता चला कि मृतक के साथ आए लोग अस्पताल से चुपचाप फरार हो गए थे। मृतक के 14 वर्षीय बेटे ने पुलिस को विशाल, सूरज, अर्जुन और भरत नाम के लोगों की जानकारी दी। इसके बाद मोबाइल लोकेशन ट्रेस कर पुलिस ने गंगरार टोल नाका से चारों को हिरासत में ले लिया और वाहन जब्त कर लिया।
बेटे का आरोप- पिता के शव को जानबूझकर जलाया
मृतक के बेटे ने पुलिस को बताया कि उसके पिता की हालत लंबे समय से खराब थी और गुजरात के कई अस्पतालों में इलाज कराया गया था। एक डॉक्टर ने परिवार को कह दिया था कि दीपक ज्यादा समय तक जीवित नहीं रहेगा। इसके बाद आरोपियों ने परिवार पर दबाव बनाया कि मौत को बीमारी नहीं बल्कि करंट हादसा बताया जाए।
बेटे के अनुसार शव के हाथ, पेट और अंगुलियों को जलाया गया। यहां तक कि अंगुली से खून निकालने की कोशिश की गई और सीने को दबाकर रक्त बहाने का प्रयास भी किया गया, ताकि हादसे जैसा दृश्य बनाया जा सके।
शराब और गरीबी को बनाते थे हथियार
दीपक की मां ने पुलिस को बताया कि आरोपी ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे जो शराब की लत, गंभीर बीमारी या आर्थिक तंगी से जूझ रहे हों। आरोपियों द्वारा शराब पीने के लिए हर महीने रुपए दिए जाते थे और बीमा की किस्तें भी वही भरते थे।
दीपक भी पत्नी की मौत के बाद शराब का आदी हो गया था। लगातार शराब सेवन से उसकी किडनी खराब हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि गिरोह पहले ऐसे लोगों का भारी बीमा करवाता था और बाद में मौत होने पर दुर्घटना दिखाकर बीमा क्लेम हासिल करने की साजिश रचता था।
83 लाख का बीमा, 71 लोगों पर भी शक
पुलिस जांच में सामने आया है कि दीपक के नाम पर करीब 83 लाख रुपए के चार अलग-अलग बीमा पॉलिसी ली गई थीं। परिवार का दावा है कि इसी गिरोह ने गांव के दर्जनों अन्य लोगों का भी बीमा करा रखा है। मृतक के बेटे ने पुलिस को बताया कि करीब 71 लोगों को इसी तरह जाल में फंसाया गया है। धर्मेंद्र सिंह यादव ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, कॉल डिटेल और बीमा दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में बीमा एजेंटों और अन्य लोगों की मिलीभगत की आशंका भी सामने आई है।
शव ले जाने तक के पैसे नहीं थे
घटना के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति भी सामने आई। दीपक का शव गुजरात ले जाने के लिए करीब 16 हजार रुपए की जरूरत थी, लेकिन परिजनों के पास राशि नहीं थी। बाद में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पुलिसकर्मियों की मदद से शव को गुजरात भेजा गया।

