24 News uipdate अहमदाबाद/आबूरोड — ब्रह्माकुमारीज संस्थान की प्रमुख प्रशासिका और वरिष्ठ राजयोगिनी दादी रतन मोहिनी का सोमवार देर रात अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 101 वर्ष की थीं। संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी बीके कोमल ने जानकारी दी कि उनका पार्थिव शरीर मंगलवार को आबूरोड स्थित संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय लाया गया, जहां उन्हें अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। अंतिम संस्कार की तिथि की घोषणा शीघ्र ही की जाएगी।
13 वर्ष की उम्र में चुना आध्यात्मिक पथ
25 मार्च 1925 को हैदराबाद (सिंध, वर्तमान पाकिस्तान) में जन्मी दादी रतन मोहिनी का मूल नाम लक्ष्मी था। महज 13 साल की उम्र में वे ब्रह्माकुमारीज संस्थान से जुड़ीं और आध्यात्मिक सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ीं। उन्होंने संस्थान के विकास और विस्तार में जीवन भर समर्पण भाव से योगदान दिया।
जीवनभर रही सक्रिय, 70 हजार किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा
दादी रतन मोहिनी ने जीवन के अंतिम समय तक भी संस्था की गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभाई। वे प्रतिदिन तड़के ब्रह्ममुहूर्त में उठकर देर रात तक ईश्वरीय सेवाओं में लीन रहती थीं। भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार हेतु उन्होंने देशभर में पदयात्राएं कीं। 1985 में 13 प्रमुख यात्राओं से शुरुआत कर 2006 में अकेले 31,000 किलोमीटर की यात्रा पूरी की। उनका कुल यात्रा मार्ग 70,000 किलोमीटर से अधिक रहा।
बहनों के प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
संस्थान में बहनों के प्रशिक्षण और सेवा केंद्रों पर नियुक्ति का महत्वपूर्ण कार्यभार भी दादी रतन मोहिनी के हाथों में था। उन्होंने देशभर के 4,600 से अधिक सेवा केंद्रों पर कार्यरत 46,000 से ज्यादा बहनों को प्रशिक्षण प्रदान किया। उनके मार्गदर्शन में अनेक युवतियाँ ब्रह्माकुमारी बनीं और सेवा के पथ पर अग्रसर हुईं।
युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत
दादी रतन मोहिनी न केवल एक कुशल प्रशासिका थीं, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का स्त्रोत थीं। वे ब्रह्माकुमारीज युवा प्रभाग की राष्ट्रीय अध्यक्षा के रूप में भी कार्यरत रहीं और जीवन मूल्यों, आत्मबल और श्रेष्ठ चरित्र के महत्व को युवाओं में जागृत करने का कार्य करती रहीं।

