उदयपुर | राष्ट्रीय पक्षी मोर के शिकार और पकाने के गंभीर आरोप में जेल गए कांग्रेस नेता की जमानत पर रिहाई के बाद जिस तरह से ढोल-नगाड़ों के साथ सार्वजनिक स्वागत और जुलूस निकाला गया, उसने वन्यजीव संरक्षण कानून, राजनीतिक मर्यादा और सामाजिक नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खेरवाड़ा एडीजे कोर्ट से शनिवार को जमानत पर रिहा हुए कांग्रेस नेता रूपलाल मीणा (45) और उनके साथ गिरफ्तार दो अन्य आरोपियों के जेल से बाहर आते ही कांग्रेस पदाधिकारियों और समर्थकों ने फूल-मालाएं पहनाकर कंधों पर उठा लिया। इसके बाद ऋषभदेव शहर में ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस निकाला गया।
मंदिर दर्शन, फिर शक्ति प्रदर्शन
जेल से रिहाई के बाद आरोपियों को पहले ऋषभदेव बस स्टैंड के पास स्थित राम मंदिर ले जाया गया, जहां दर्शन किए गए। इसके बाद शाम को शहर में जुलूस निकाला गया।
इस दौरान पूर्व शिक्षा मंत्री एवं खेरवाड़ा विधायक दयाराम परमार सहित कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे।
अपराध क्या, संदेश क्या?
मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और उसका शिकार वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद आरोपी का इस तरह सार्वजनिक स्वागत होना आमजन में असंतोष और आक्रोश का कारण बन रहा है।
लोग सवाल कर रहे हैं कि
- क्या राष्ट्रीय पक्षी के शिकार का आरोपी सम्मान का पात्र है?
- क्या राजनीतिक रसूख कानून से ऊपर हो गया है?
- क्या यह संदेश नहीं जा रहा कि अपराध के बाद भी जश्न मनाया जा सकता है?
खेत में चल रही थी नॉनवेज पार्टी
गौरतलब है कि 21 दिसंबर को ऋषभदेव थाना क्षेत्र के बीलख गांव में रूपलाल मीणा के खेत पर मोर को पकाकर खाने की तैयारी की जा रही थी।
पुलिस ने मौके से रूपलाल मीणा, हिस्ट्रीशीटर अर्जुन मीणा (जिस पर 50 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं) और राकेश मीणा को गिरफ्तार किया था।
तीनों को रिमांड के बाद जेल भेजा गया था। करीब 10 दिन जेल में रहने के बाद शनिवार को जमानत मिली।
संरक्षण बनाम राजनीति
एक ओर सरकार और राजनीतिक दल वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण बचाने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय पक्षी के शिकार के आरोपी का सार्वजनिक महिमामंडन इन दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है।

