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पुलिस थानों के CCTV फुटेज देने होंगे RTI में, स्टेट क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो का आदेश

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— रिपोर्ट —जयवंत भैरविया

24 News Update उदयपुर।
सुप्रीम कोर्ट पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों को लेकर सुनवाई कर रहा है और उसमें भी सीसीटीवी कैमरे बंद होने पर स्वत: संज्ञान लिया हुआ है। आदेश पर आदेश आ रहे है। राज्य सरकार के माध्यम से पुलिस विभाग के कागजों के घोड़े दौड़ा रहा है। निचले थाना स्तर तक यह जताने का प्रयास कर रहा है कि सब कुछ ठीक हो रहा है। आदेश पोस्टर से लेकर हिदायतों तक ऐसा शो ओफ किया जा रहा है मानों जनता को सीसीटीवी से न्याय मिलने ही वाला हो। मगर हालात जमीन पर विकट हैं। आधी रात का पुलिस की छापेमार कार्रवाई हो या फिर थानों के बाहर या अंदर किसी से दुरव्यवहार की बात। जब जब पुलिस पर आरोप लगे पुलिस खामोश हो गई, नेता पुलिस की गोद में जाकर बैठ गए। जन प्रतिनिधि बोले ही नहीं क्योंकि उनकी फाइलें खुलने का डर है। ऐसे में जनता जब जब पुलिस की चौखट पर कोर्ट के आदेश को लेकर पहुंची, आरटीआई या अन्य जरियों से सीसीटीवी फुटेज मांगे, उसे नहीं दिए गए। इसके बाद ना तो सिस्टम कोई कार्रवाई कर पाया ना ही न्यायालय कुछ कर पाया। लेकसिटी उदयपुर में भी सीसीटीवी के फुटेज नहीं दिए जाने का मामला गरमाया हुआ है।

हलफनामे का सच वास्तव में कहां हो जाता है गायब
बंद बताए जाने वाले कैमरो और खराब हार्ड डिस्क पर गम्भीर नाराजगी जताते हुए PIL दर्ज की है और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा है, जिसके बाद राजस्थान सरकार की और से प्रस्तुत हलफनामे में बताया गया है कि सभी पुलिस थानों में 16 cctv कैमरे लगाने की व्यवस्था की जा रही है जिसके लिए 75 करोड़ का बजट भी स्वीकृत किया गया है ,इस काम को पूरा करने की डेड लाइन भी 31 मार्च तक तय की गई है। ये कैमरे नाइट विजन और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग क्षमता से लैस होंगे, जो प्रवेश, निकास, हवालात और लॉबी में अनिवार्य होंगे।

स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने भी कहा फुटेज दो
अब आते है मुख्य बात पर, आम जनता के मन मे ये सवाल रहता है कि कोई व्यक्ति किसी थाने के CCTV फुटेज कैसे प्राप्त कर सकता है ?, नियम क्या है क्योंकि स्टेट क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो, सूचना आयोग और सुप्रीम कोर्ट तक के आदेश की पालना उदयपुर में नही की जा रही है। इसका स्पष्टीकरण जानने के लिये SCRB याने कि स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने साफ जवाब दिया है कि पुलिस थाने के cctv फुटेज RTI के अंतर्गत लिये जा सकते है, अन्य कोई नियम नही है और न ही कारण बताने की आवश्यकता है, अब देखने वाली बात ये है कि थानों के cctv फुटेज न देने पड़े उसके लिये क्या नए तोर तरीके अपनाए जाते है

थानों में सीसीटीवी कैमरे से जुड़ी मुख्य बातें
संख्या और स्थान: प्रत्येक पुलिस थाने में 12 की जगह अब 16 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जो थाने के प्रमुख स्थानों (प्रवेश/निकास द्वार, लॉक-अप, गलियारे, लॉबी, और पूछताछ कक्ष) को कवर करेंगे।
तकनीकी विशेषता: कैमरों में नाइट विजन और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा अनिवार्य है, ताकि कस्टडी के दौरान होने वाली हर हरकत रिकॉर्ड हो सके।

डाटा स्टोरेज: रिकॉर्डिंग को कम से कम 18 महीने तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था (बैकअप) होनी चाहिए।
उद्देश्य: पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों, मानवाधिकारों के उल्लंघन और पूछताछ के दौरान दुर्व्यवहार को रोकना। राजस्थान के अलावा, अन्य राज्यों में भी इन निर्देशों को लागू करने के लिए, जैसे झारखंड के 334 थानों में 5268 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं।

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