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भिवाड़ी फैक्ट्री ब्लास्ट: 7 सेकेंड में उजड़े 8 घर, अवैध पटाखा यूनिट में इंसान बन गए राख

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भिवाड़ी . भिवाड़ी के खुशखेड़ा–कारौली औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार सुबह हुआ विस्फोट कोई साधारण हादसा नहीं था, बल्कि यह अवैध गतिविधियों, लापरवाही और सिस्टम की चूक का भयावह परिणाम था। सुबह करीब साढ़े नौ बजे एक केमिकल फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके और आग ने ऐसा मंजर छोड़ा, जिसे देखने वालों की रूह कांप गई। 8 मजदूर जिंदा जलकर मर गए, जबकि 4 अन्य 90 प्रतिशत से अधिक झुलस गए, जिन्हें गंभीर हालत में एम्स दिल्ली रेफर किया गया।

हॉल बना मौत का पिंजरा

ब्लास्ट के बाद जब प्रशासन और मीडिया टीम मौके पर पहुंची, तो फैक्ट्री के अंदर का दृश्य वीभत्स था। 35×80 फीट के हॉल में जगह-जगह हड्डियों के ढेर, जले हुए शरीरों के अवशेष और बारूद से भरे प्लास्टिक खोल बिखरे पड़े थे। फर्श कोयले की तरह काला पड़ चुका था। जांच में सामने आया कि महज 7 सेकेंड के भीतर 4 से 5 धमाके हुए, जिनकी तीव्रता इतनी अधिक थी कि लोहे के ढांचे तक पिघल गए।

भागने का मौका भी नहीं मिला

प्रत्यक्षदर्शियों और दमकल कर्मियों के अनुसार, धमाकों के बाद मजदूर जान बचाने के लिए भागे, लेकिन लगातार ब्लास्ट और आग के गोले बन चुके हॉल में कोई रास्ता नहीं बचा। कई मजदूर दीवारों से टकराकर गिर गए और वहीं जल गए। शटर ब्लास्ट के दबाव से उखड़कर सामने की फैक्ट्री तक जा गिरा, जिससे आसपास की फैक्ट्रियों की खिड़कियों के कांच सड़क पर बिखर गए।

5 घंटे बाद भी तपती रहीं दीवारें

आग पर काबू पाने के लिए दमकल की गाड़ियों ने करीब दो घंटे तक पानी बरसाया, लेकिन इसके बावजूद हॉल की दीवारें 5 घंटे बाद भी इतनी गर्म थीं कि पास खड़ा होना मुश्किल था। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकेत देता है कि अंदर उच्च ज्वलनशील विस्फोटक सामग्री मौजूद थी। पहली मंजिल पर सीमेंट समेत टाइल्स उखड़ गईं और छत के पिलर का लोहे का हिस्सा अलग पड़ा मिला।

अवैध पटाखा फैक्ट्री का खुलासा

जांच में साफ हुआ कि फैक्ट्री में प्लास्टिक यूनिट की आड़ में अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे। मौके से बारूद, पटाखे और पैकिंग सामग्री बरामद की गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि फैक्ट्री हमेशा बंद रहती थी, शटर अंदर से बंद रहते थे और मजदूर बाहर किसी से बातचीत नहीं करते थे। वे फैक्ट्री के अंदर ही रहते और वहीं खाना बनाते थे। घटना के समय करीब 25 मजदूर काम कर रहे थे।

मृतकों की पहचान, डीएनए से होगी पुष्टि

हादसे में बिहार के मोतिहारी और चंपारण जिले के रहने वाले सुजंत, मिंटू, अजीत, रवि, श्याम और अमरेश सहित कुल 8 मजदूरों की मौत हुई। शव इतनी बुरी तरह जल चुके हैं कि पहचान डीएनए जांच के बाद ही संभव होगी। पोस्टमॉर्टम मेडिकल बोर्ड से कराया जाएगा।

कार्रवाई शुरू, फैक्ट्री सील

पुलिस ने फैक्ट्री मैनेजर अभिनंदन को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और यूनिट को सील कर दिया गया है। एसपी के अनुसार, मृतकों के परिजनों की शिकायत पर फैक्ट्री मालिक और संचालनकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। एफएसएल टीम ने हड्डियों और जले विस्फोटक पदार्थों के सैंपल जुटाए हैं।

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