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अजमेर में हुए होटल नाज अग्निकांड मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए होटल के मालिक राजेंद्र कुमार (42) और प्रबंधक श्रीकांत पाण्डेय (47) को गिरफ्तार कर लिया है। इस हादसे में 6 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जिनमें 3 पुरुष, 2 महिलाएं और 1 बालक शामिल थे। इस मामले में लापरवाह अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उनके होते हुए आखिर कैसे होटल चल रहा था। क्या कमीशनखोरी हो रही थी या खुला भ्रष्टाचार का जानलेवा खेल चल रहा था, इसका जवाब कौन देगा।
गंभीर लापरवाहियां उजागर
पुलिस अधीक्षक (एसपी) वंदिता राणा के निर्देशन में गठित विशेष टीम की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
- फायर NOC का अभाव: होटल के पास फायर सेफ्टी लाइसेंस (NOC) नहीं था।
- आपातकालीन निकास की कमी: होटल में इमरजेंसी निकास की उचित व्यवस्था नहीं थी।
- सुरक्षा उपकरणों का अभाव: इमरजेंसी अलार्म जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाएं भी नहीं थीं।
- स्टाफ की कमी: होटल में कर्मचारियों की संख्या भी पर्याप्त नहीं पाई गई।
- भवन निर्माण नियमों का उल्लंघन: होटल का निर्माण भी तय मानकों के विपरीत पाया गया।
शिकायत पर दर्ज हुआ मामला
यह मामला 1 मई को रेहाना (37) की शिकायत पर दर्ज किया गया था। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि आरोपियों को सुरक्षा नियमों की अनदेखी के खतरों की पूरी जानकारी थी, फिर भी उन्होंने आवश्यक सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज किया।
पुलिस का सख्त रुख
दोनों आरोपी राजेंद्र कुमार और श्रीकांत पाण्डेय रामगंज, अजमेर के रहने वाले हैं। पुलिस ने इस घटना को होटल प्रबंधन की घोर लापरवाही का सीधा परिणाम माना है। अब आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

