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जेजेएम घोटाले में एसीबी ने दिल्ली से दबोचा फरार पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल को दबोचा

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24 News Update जयपुर। जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लंबे समय से फरार चल रहे पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। एसीबी टीम ने उन्हें दिल्ली से हिरासत में लेकर जयपुर लाया, जहां पहले से ही उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी था। एसीबी महानिदेशक गोविंद गुप्ता के अनुसार, वर्ष 2024 से चल रही इस जांच में यह एक महत्वपूर्ण गिरफ्तारी है। अब तक कुल 10 आरोपियों को पकड़ा जा चुका है, जबकि तीन अन्य अभी भी गिरफ्त से बाहर हैं।
जांच में सामने आया कि जेजेएम के तहत टेंडर प्रक्रिया में सुनियोजित तरीके से अनियमितताएं की गईं। मैसर्स गणपति ट्यूबवेल और मैसर्स श्याम ट्यूबवेल ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर टेंडर हासिल किए। चौंकाने वाली बात यह रही कि संबंधित अधिकारियों को इस गड़बड़ी की जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई और करीब 960 करोड़ रुपए के टेंडर चुनिंदा फर्मों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जारी कर दिए गए।
इसके अलावा 50 करोड़ रुपए से अधिक के कार्यों में अनिवार्य स्थल निरीक्षण भी नहीं किया गया, जो पूरे प्रकरण में पद के दुरुपयोग और लापरवाही को उजागर करता है। मामले की जांच अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव की निगरानी में चल रही है। वहीं, डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह और डीआईजी ओमप्रकाश मीणा के निर्देशन में गठित विशेष जांच दल तकनीकी और दस्तावेजी पहलुओं की गहराई से जांच कर रहा है।
इससे पहले 17 फरवरी को एसीबी ने इस मामले में व्यापक कार्रवाई करते हुए जयपुर, बाड़मेर, जालोर, सीकर, बिहार, झारखंड और दिल्ली सहित 15 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इस दौरान फर्जी बिलिंग, वित्तीय अनियमितताएं और टेंडर प्रक्रिया में गंभीर खामियां सामने आई थीं। उसी दिन जलदाय विभाग के 9 अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि सुबोध अग्रवाल के ठिकानों पर भी दबिश दी गई थी।
एसीबी ने 18 फरवरी को अग्रवाल के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया था। अब उनकी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी को इस पूरे नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासों की उम्मीद है। फिलहाल आरोपी से गहन पूछताछ जारी है।

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