• बेटियों को खाना बनाना ही नहीं, तलवार चलाना भी सिखाना चाहिए – राष्ट्रसंत पुलक सागर
  • पलके झुका कर जियो, ये दुनिया तुम्हे पलकों पर बिठा लेगी – राष्ट्रसंत पुलक सागर
  • नगर निगम प्रांगण में 27 दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव का तीसरा दिन

24 News Update उदयपुर 22 जुलाई। सर्वऋतु विलास स्थित महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में राष्ट्रसंत आचार्यश्री पुलक सागर महाराज ससंघ का चातुर्मास भव्यता के साथ संपादित हो रहा है। मंगलवार को टाउन हॉल नगर निगम प्रांगण में 27 दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव के तीसरे दिन नगर निगम प्रांगण में युवाओं के करियर विषय पर विशेष प्रवचन हुए।
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष विनोद फान्दोत ने बताया कि मंगलवार को कार्यक्रम में महाराणा भूपाल चिकित्सालय अधीक्षक डॉ. आर एल सुमन, उदयपुर, भाजपा प्रभारी बंसीलाल खटीक, पूर्व अध्यक्ष यूजीसीआई मांगीलाल लुणावत, समाज सेवी मांगीलाल नावडिय़ा, धर्मोत्सव समिति के दिनेश मकवाना आदि अतिथि के रूप में मौजूद रहे। मंगलाचरण सिटीप्राईड पब्लिक स्कूल के बच्चों ने किया।
चातुर्मास समिति के पमर संरक्षक राजकुमार फत्तावत व मुख्य संरक्षक पारस सिंघवी ने बताया कि ज्ञान गंगा महोत्सव के दूसरे दिन आचार्य पुलक सागर महाराज ने कहां कि एक युवा मेरे पास आया और बोला कि महराज आप कुंडली देखना जानते है, क्या आप अंक ज्योतिष जानते है, क्या आप भविष्य देखना जानते है, मैने बोला तेरी क्या समस्या है ये बता, वो बोला मैं युवा हूं पढ़ रहा हूं, मेरा फ्यूचर क्या है? मैने बोला मैं कुंडली तो नहीं देखता, हस्तरेखा नहीं देखा, लेकिन तेरा भविष्य जरूर बताऊंगा । मैने कहा जैसा तेरा नेचर होगा वैसा तेरा फ्यूचर होगा, व्यवहार पर इंसान का भविष्य निर्भर करता है । युवा भविष्य को लेकर जीता है, बूढ़ा अतीत में जीता है । मकान सुंदर बनाओगे तो लोग पूछेंगे कि इसका आर्किटेक्ट कौन है? बढिय़ा ज्वैलरी पहनोगे तो लोग कहेंगे कि इसका जौहरी कौन है? लेकिन अपने नेचर स्वभाव को देखकर आपको कोई ये नहीं पूछेगा क्या किसने दिया, क्योंकि व्यवहार अपना स्वयं का होता है। नेचर में स्वयं की तारीफ होती है । नेचर अच्छा हो तो वह आदमी को आदमी से जोड़ता है, और नेचर खराब हो तो सभी से रिश्ता तोड़ता है । आज की पीढ़ी सिर्फ धन कमाने में लगी है, लेकिन मैं कहूंगा कि समाज में थोड़ी इज्जत कमाना जरूरी है। जो माता पिता की बात ध्यान से सुनते है, उन्हें दुनिया भर की बातें सुनने का अवसर नहीं मिलता । आज कल का युवा ने गूगल को सब कुछ मान लिया है, लेकिन एक बात याद रखना मां बाप से आपको वही सीखाते है, जो आपके जीवन के लिए जरूरी है और गूगल आपको वो सब भी दिखाएगा जो आपके लिए जरूरी नहीं है । जो आंख बंद कर प्यार करे वो प्रेमिका होती है, जो आंख खोल कर प्यार करें वह दोस्त होता है, जो आंख बंद होने के बाद भी प्यार करें वो मां होती है, और एक पिता होता है जो हर स्थिति में प्यार करता है, लेकिन जताता नहीं है । पिता सूर्य के समान होता है, सूर्य होता गर्म है लेकिन प्रकाश देता है, उसी तरह पिता बाहर से कठोर हो सकता है, लेकिन पिता जैसा विशाल हृदय किसी का नहीं हो सकता । एक बात याद रखना पिता से बड़ी दौलत दुनिया में नहीं हो सकती । मां घर चलाती है, लेकिन पिता उस घर को चलाने की व्यवस्था करता है ।
आचार्य ने कहां कि डिग्रियों से जिंदगी नहीं बदलती, स्वभाव अच्छा नहीं हो तो वह किसी काम की नहीं । एक ड्रम में नींबू का रस भर दो, उसके पास एक भी चींटी नहीं आएगी और एक जगह एक बूंद शक्कर की रख दो, वहां हजारों चींटियां उसकी तरफ आकर्षित हो जाएगी । स्वभाव खट्टा होगा तो हमारी तरफ कोई आकर्षित नहीं होगा, और स्वभाव मीठा होगा तो सभी हमारे पास दौड़े चले आएंगे । अपनी बेटियों को संघर्ष में जीने की भी कला सिखाओ, हर परिस्थिति में बेटी अपना घर चला सके, बेटियों को बड़ी बड़ी डिग्रियां तो दिलवा दी, लेकिन आज बेटियों को रसोई में खाना बनाना तक नहीं आता। बेटियों में आजकल सहनशीलता कम हो गई है । बेटियों को ऐसी शिक्षा दो की वह जिंदगी भर शीलवान और चरित्रवान बन सके। लडक़ी को सब कुछ आना चाहिए, बेटियों को मॉड्यूलर किचन में भले ही रखो लेकिन उन्हें भारतीय संस्कृति को याद रखने की शिक्षा जरूर देवे । लडक़ी को सब कुछ आना चाहिए, बेटियों को मॉड्यूलर किचन में भले ही रखो लेकिन उन्हें भारतीय संस्कृति को याद रखने की शिक्षा जरूर देवे । देश में आज कल की परिस्थिति को देखते हुए तो मैं तो ये कहूंगा कि बेटियों को खाना बनाना ही नहीं, उन्हें तलवार चलाना भी आना चाहिए । विधर्मी लोग बेटियों की अस्मिता को नोंच कर उन्हें छोड़ देते है । बहु घर की लक्ष्मी है, और बेटी दूसरे घर को रोशन करेगी । बहु से ज्यादा अच्छी बेटी कभी मिल नहीं सकती, वो अपना घर छोड़ कर आती है और जीवन भर तुम्हारा ध्यान रखती है । इसीलिए बहु घर की कुलवधु है । आज से ही बहु को बहु समझना शुरू कर दो । आचार्य श्री ने अपने आशीर्वचन में समाज को धर्म, संयम और नैतिक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। आचार्य श्री की वाणी ने समस्त श्रद्धालुओं को आत्म चिंतन और आत्म कल्याण की प्रेरणा दी।
चातुर्मास समिति के महामंत्री प्रकाश सिंघवी व प्रचार संयोजक विप्लव कुमार जैन ने बताया कि 31 जुलाई को मोक्ष सप्तमी, 9 अगस्त को रक्षाबंधन और 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विशेष प्रवचन व आयोजन प्रस्तावित हैं। इस अवसर पर विनोद फान्दोत, राजकुमार फत्तावत, शांतिलाल भोजन, आदिश खोडनिया, पारस सिंघवी, शांतिलाल मानोत, नीलकमल अजमेरा, शांतिलाल नागदा सहित उदयपुर, डूंगरपुर, सागवाड़ा, साबला, बांसवाड़ा, धरियावद, भीण्डर, कानोड़, सहित कई जगहों से हजारों श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे।


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