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रामदेवरा की धरती पर एकता के विराट संगम में सामाजिक समरसता का संदेश, प्रो. अमेरिका सिंह की प्रभावशाली भागीदारी

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24 News Update जैसलमेर/रामदेवरा। मरुधरा की आस्था नगरी रामदेवरा एक बार फिर सामाजिक एकता के अद्भुत उदाहरण की साक्षी बनी, जब यहां आयोजित भव्य सामाजिक एकता कार्यक्रम में सर्व समाज के करीब एक लाख से अधिक लोगों की उपस्थिति ने इसे जनसैलाब में बदल दिया। आयोजन का नेतृत्व युनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन के चेयरपर्सन मेघराज सिंह रॉयल ने किया, जिन्होंने कार्यक्रम को सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता का मंच प्रदान किया।

इस महत्वपूर्ण आयोजन में देश के प्रख्यात शिक्षाविद् प्रोफेसर अमेरिका सिंह की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उनके साथ डॉ. विक्रांत सिंह तोमर सहित कई विशिष्ट वक्ताओं ने मंच साझा करते हुए बदलते समय में समाज की भूमिका और एकता के महत्व पर सारगर्भित विचार रखे।

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक समरसता, भारतीय ज्ञान परंपरा, स्थानीय कला एवं शिल्प, कृषि विकास और आधुनिक तकनीक जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में समाज की एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत है, जो विकास की दिशा तय करती है।

प्रोफेसर अमेरिका सिंह ने अपने वक्तव्य में भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को आधुनिक युग से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञान, तकनीक और परंपरा का संतुलन ही समाज को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करता है। वहीं डॉ. विक्रांत सिंह तोमर ने ग्रामीण विकास, कृषि नवाचार और स्थानीय कौशल को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया।

अपने संबोधन में मेघराज सिंह रॉयल ने कहा कि सामाजिक एकता केवल एक विचार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से विभिन्न वर्गों और समुदायों को एक मंच पर लाकर संवाद और सहयोग की भावना को मजबूत किया जा रहा है।

आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक विकास की दिशा में एक मजबूत पहल के रूप में सामने आया। स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को मंच देकर उनकी प्रतिभा को पहचान दिलाने का भी सराहनीय प्रयास किया गया।

कार्यक्रम के सफल संचालन और समन्वय में आयोजकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। इस अवसर पर जारीकर्ता गजेंद्र सिंह भाटी, OSD, प्रोफेसर अमरीक सिंह, ने बताया कि इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और आने वाले समय में भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे।

मरुभूमि की इस पावन धरती से उठा एकता का यह संदेश अब दूर-दूर तक गूंज रहा है, जो सामाजिक समरसता और सामूहिक प्रगति की नई दिशा तय करता नजर आ रहा है।

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