24 News Update जयपुर। राजस्थान की सरकारी भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़े का एक और बड़ा चेहरा सामने आया है। राजस्थान एसओजी की जांच में खुलासा हुआ है कि पढ़ाई में कमजोर अभ्यर्थी लाखों रुपए देकर अपने स्थान पर होनहार युवकों को परीक्षा में बैठा रहे थे। इस संगठित नेटवर्क में डमी कैंडिडेट, मध्यस्थ और तकनीकी हेरफेर का ऐसा खेल चल रहा था, जिसने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल ने शुक्रवार को बताया कि एसओजी ने लगातार कार्रवाई करते हुए तीन बड़े मामलों का खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि कई मूल अभ्यर्थियों को खुद अपनी योग्यता पर भरोसा नहीं था, इसलिए उन्होंने अधिक पढ़े-लिखे और तेज अभ्यर्थियों को पैसे देकर परीक्षा में बैठाया। 5 लाख में तय हुआ सौदा, शिक्षक बना डमी अभ्यर्थीपहला मामला राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्राध्यापक हिन्दी (स्कूल शिक्षा) भर्ती परीक्षा-2022 का है।जांच में सामने आया कि जालौर निवासी मनोहर लाल ने मूल अभ्यर्थी देराराम की जगह परीक्षा दी थी। मनोहर लाल वर्तमान में सरकारी स्कूल में सेकंड ग्रेड टीचर है।पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि देराराम पढ़ाई में कमजोर था और उसे खुद के चयन की उम्मीद नहीं थी। इसके बाद दोनों के बीच करीब 5 लाख रुपए में डील हुई। मनोहर लाल ने प्रवेश पत्र पर फोटो बदलकर और उपस्थिति पत्रक में हेरफेर कर परीक्षा दी। एसओजी के अनुसार दोनों की पहचान जोधपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान हुई थी। मनोहर लाल को 1 मई को गिरफ्तार किया गया, जबकि मुख्य आरोपी देराराम अब भी फरार है। पूर्व सैनिक को कम मेरिट का भरोसा, 7.5 लाख में खरीदा ‘सफलता का रास्ता’दूसरा मामला भी प्राध्यापक हिन्दी भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़ा है। इस केस में फलौदी निवासी अशोक जानी को गिरफ्तार किया गया है।एसओजी जांच में सामने आया कि मूल अभ्यर्थी रामूराम, जो भूतपूर्व सैनिक है, ने कम कटऑफ का फायदा उठाने की योजना बनाई। उसे भरोसा था कि यदि उसकी जगह कोई बेहतर तैयारी वाला उम्मीदवार परीक्षा देगा तो चयन आसान हो जाएगा। इसके लिए अशोक जानी को अपनी जगह परीक्षा देने के लिए तैयार किया गया और करीब 7.5 लाख रुपए में सौदा तय हुआ। यहां भी फर्जी फोटो और हस्ताक्षरों के जरिए परीक्षा दी गई।रामूराम को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश किया जा चुका है, जबकि अशोक जानी को 30 अप्रैल को पकड़ा गया। 6 लाख में ‘सेट’ हुआ शिक्षक भर्ती पेपर, बीच में आया दलालतीसरा मामला राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित शारीरिक शिक्षक सीधी भर्ती परीक्षा-2022 का है। जांच में सामने आया कि जालौर निवासी सुनील ने मूल अभ्यर्थी विमल कुमार पाटीदार की जगह परीक्षा दी। विमल को अपनी तैयारी कमजोर लग रही थी, इसलिए उसने जयपुर में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे मध्यस्थ अनिल विश्नोई से संपर्क किया। अनिल ने अपने परिचित सुनील को डमी कैंडिडेट बनने के लिए तैयार किया। करीब 6 लाख रुपए में सौदा तय हुआ, जिसमें डेढ़ लाख रुपए एडवांस दिए गए थे। एसओजी ने इस मामले में सुनील और अनिल विश्नोई दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। हाईटेक जांच से खुला फर्जीवाड़े का राजएडीजी विशाल बंसल के मुताबिक इन मामलों में आरोपियों ने दस्तावेजों में बेहद सावधानी से हेरफेर किया था, जिससे डमी अभ्यर्थियों की पहचान करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। लेकिन एसओजी द्वारा विकसित विशेष सॉफ्टवेयर और परिस देशमुख की तकनीकी विश्लेषण टीम की मदद से आरोपियों की सटीक पहचान की गई। इन सभी मामलों में आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश, सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम और आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation व्हाट्सएप पर बॉस बनकर लगाई 5.30 करोड़ की चपत, राजस्थान पुलिस ने 17 साइबर ठगों को दबोचा