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फर्जी एजुकेशन संस्था ने बेरोजगार युवाओं से लाखों की ठगी की, वेलफेयर संस्था के नाम पर 180 युवाओं से वसूले पैसे, नौकरी देने का झांसा देकर गायब हुई टीम

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24 News Update बांसवाड़ा, जिले के दानपुर थाना क्षेत्र में एक बड़े शिक्षा घोटाले का खुलासा हुआ है। यहां स्वामी विवेकानंद एजुकेशन एंड वेलफेयर संस्था नामक एक फर्जी संगठन द्वारा लगभग 180 बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपए ठगने का मामला सामने आया है।
पीड़ित युवाओं ने सोमवार को सामूहिक रूप से दानपुर थाने में शिकायत दर्ज करवाई।

शिक्षक और एरिया मैनेजर के पद का झांसा

शिकायत के अनुसार, संस्था के एजेंट कालाखेता निवासी केसर व उसके पति नारायण तथा लता चौहान ने युवाओं को “शिक्षक सहायक” और “एरिया मैनेजर” के पदों पर नियुक्ति का झांसा दिया। बताया गया कि चयनित उम्मीदवारों को गांव-ढाणियों में बच्चों को पढ़ाने और पोषाहार वितरण का कार्य सौंपा जाएगा।
युवाओं से शिक्षक सहायक पद के लिए ₹7,000 से ₹10,000 और एरिया मैनेजर पद के लिए ₹30,000 से ₹35,000 तक वसूले गए। इसके बदले उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र भी जारी कर दिए गए।

दो-तीन महीने तक कराया काम, फिर नहीं दी सैलरी

कई युवाओं को 2 से 3 महीने तक कार्य भी करवाया गया, लेकिन किसी को वेतन नहीं मिला। जब युवाओं ने भुगतान मांगा, तो संस्था के एजेंट गायब हो गए या बहाने बनाने लगे।
बाद में जांच में सामने आया कि संस्था का कोई सरकारी पंजीकरण या मान्यता नहीं है।

पैसे मांगने पर मिली धमकी

छोटी सरवन क्षेत्र की पूजा निनामा ने बताया कि उसने एरिया मैनेजर पद के लिए ₹32,000 दिए थे। तीन महीने काम करवाने के बाद तनख्वाह नहीं दी गई।
जब युवाओं ने अपनी राशि मांगी तो एजेंट केसर और नारायण ने धमकी दी — “जहां शिकायत करनी है करो, जेल भेज दो, जेल से आकर देख लेंगे।”
छात्र नेता आनंद निनामा और सामाजिक कार्यकर्ता प्रभुलाल कटारा ने कहा कि ऐसे फर्जी संस्थान क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं और बेरोजगार युवाओं को झूठे वादों से ठग रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। पीड़ितों में देवीलाल, सीमा खराड़ी, राजू कुमारी, आशा निनामा, पप्पू सिंह मईडा, मुकेश, विकास मईडा, सविता कुमारी, जयंतीलाल, वीरचंद, पवन रावत, लतेश मईडा सहित कई अन्य शामिल हैं।
पुलिस जांच शुरू, ठगों पर शिकंजा कसने की तैयारी
दानपुर थानाधिकारी राजवीर सिंह ने बताया कि पीड़ितों की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने कहा कि “रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
संस्था का पक्ष
“कुछ लोगों को उनका भुगतान कर दिया गया है, बाकी को जल्द सैलरी दी जाएगी।” वहीं लता चौहान ने कहा कि संस्था ने केवल ₹5,000 बतौर “एंट्री फीस” ली थी, उससे अधिक राशि स्थानीय एजेंटों ने वसूली। संस्था के कॉर्डिनेटर दीपक कुमार ने कहा कि “बांसवाड़ा जिले में 843 लोग संस्था से जुड़े हैं और सबको समय पर सैलरी दी जा रही है। छोटी सरवन से आई शिकायत उधारी का मामला है।”

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