24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। भारतीय किसान संघ कार्यालय प्रांगण में आजादी के 79वें अमृतवर्ष पर राष्ट्रप्रेम, स्वदेशी चेतना और जैविक कृषि के संदेश के साथ भव्य समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ नागरिक शंकरलाल जी ने की, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चित्तौड़ प्रांत के सह-कार्यवाह दीपक जी शुक्ल और भारतीय किसान संघ राजस्थान प्रदेश के बीज प्रमुख डॉ. राजेंद्र बाबू दुबे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह की शुरुआत ध्वजारोहण और राष्ट्रगान से हुई तथा स्वतंत्रता आंदोलन के वीर सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मुख्य वक्ता डॉ. दुबे ने स्वदेशी जागरण, जैविक कृषि और पारंपरिक बीजों की महत्ता पर विस्तार से संबोधन देते हुए विदेशी बीजों एवं जीएम फसलों को किसान हितों के विपरीत बताते हुए आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था को समय की आवश्यकता बताया। मुख्य अतिथि दीपक जी शुक्ल ने कहा कि अखंड भारत कोई कल्पना नहीं बल्कि एक जीवंत संकल्प है जिसे व्यवहार में लाकर साकार करना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है और भारतीय संस्कृति, सनातन जीवन दृष्टि और एकात्म राष्ट्रभाव की ऐतिहासिक निरंतरता को कायम रखना समय का आह्वान है। जिला संगठन मंत्री कपिल देव जी ने अपने संबोधन में कहा कि जो हमें प्राप्त है उसमें संतोष रखते हुए हमें उन मूल्यों और सांस्कृतिक धरोहरों को पुनः प्राप्त करने का भी संकल्प लेना चाहिए जिन्हें हमने समय के साथ खो दिया है, क्योंकि अखंड भारत केवल भौगोलिक सीमा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है। कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट भारत कुमावत (जिला मंत्री) ने किया। इस अवसर पर चित्तौड़ प्रांत संगठन मंत्री परमानंद जी भाई साहब, संभाग मंत्री केशव जी पोरवाल, उदयपुर संभाग महिला प्रमुख शारदा जी कलाल, उदयपुर जिला उपाध्यक्ष माणक जी चौबीसा, जिला कोषाध्यक्ष राजेंद्र जी टेलर, जिला सहमंत्री डॉ. भवेन्द्र जी तिवारी, जिला महिला प्रमुख पार्वती जी मेनारिया, जिला विधि प्रमुख भंवर सिंह जी राठौड़, महानगर अध्यक्ष दिलीप जी लोहार, महानगर उपाध्यक्ष ललित जी पालीवाल तथा बड़ी संख्या में किसान संघ के कार्यकर्ता एवं स्वयंसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के घोष के साथ राष्ट्र के सर्वांगीण विकास और स्वदेशी पथ पर आगे बढ़ने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
भारतीय किसान संघ कार्यालय पर धूमधाम से मनाया गया 79वाँ स्वाधीनता दिवस, राष्ट्रभक्ति, स्वदेशी चिंतन और जैविक कृषि का संकल्प गूंजा

Advertisements
