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कुंभलगढ़ रेंज में 7 बंदरों का बेरहमी से शिकार, कथोड़ी समाज के 12 आरोपी गिरफ्तार

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24 News Update कुंभलगढ़ | कुंभलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य क्षेत्र में सात बंदरों की निर्मम हत्या का मामला सामने आया है। इस जघन्य कृत्य को अंजाम देने के आरोप में सायरा थाना पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में आदिवासी कथोड़ी समाज के 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामला कड़ेच ग्राम पंचायत के रीछवाड़ा गांव का है, जहां आरोपियों ने पहले बंदरों को फंसाया, फिर लोहे के धारदार हथियारों से उनके शवों के टुकड़े कर मांस की पोटलियां तैयार कीं।

वन अधिकारियों पर हमला करने की कोशिश
घटना की सूचना मिलते ही हायला रेंज के फॉरेस्टर तुलसीराम मेघवाल अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन आरोपियों ने उन्हें घेरकर हमला करने का प्रयास किया। स्थिति तनावपूर्ण हो गई, हालांकि अधिकारी खुद को किसी तरह सुरक्षित निकालने में सफल रहे और तुरंत अतिरिक्त टीम को मौके पर बुलाया गया।

इसके बाद बोखाड़ा रेंज से क्षेत्रीय वन अधिकारी जयंतीलाल गरासिया, फॉरेस्टर नारायण सिंह राणावत, वनरक्षक वीरेंद्र सिंह शेखावत, अशोक गरासिया, ओमप्रकाश और नीरज मौके पर पहुंचे। तलाशी अभियान में आरोपियों के पास से बंदरों का मांस, शिकार में प्रयुक्त हथियार और चार मोटरसाइकिल बरामद की गईं।

लोहे के तार से फंसाकर किया शिकार, कबूला गुनाह
पूछताछ में सभी 12 आरोपियों ने शिकार की बात स्वीकार की। आरोपियों ने बताया कि उन्होंने लोहे के तारों से बंदरों को फंसाया, फिर धारदार हाशिए से उनकी हत्या की और मांस को पोटलियों में भर लिया। सभी आरोपी ओगणा थाना क्षेत्र के समीजा गांव के निवासी हैं। उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

जंगल में कड़ी निगरानी, वन विभाग अलर्ट
इस घटना के बाद वन विभाग ने पूरे क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। विभाग का कहना है कि जैव विविधता और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, कथोड़ी समाज परंपरागत रूप से जंगलों में रहकर शिकार पर निर्भर था। राज्य सरकार द्वारा अब उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है, लेकिन कुछ समूह अब भी पुरानी आदतों को नहीं छोड़ पा रहे हैं। वन्यजीवों के प्रति ऐसी हिंसा न केवल अवैध है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरा है।

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