24 न्यूज अपडेट उदयपुर। 37 हजार अधिशेष शिक्षकों के समायोजन का आदेश दूसरी बार स्थगित कर दिया गया है। शिक्षा विभाग को समझ नही आ रहा बिना रिक्त पदों का समायोजन आखिर कैसे करें। बकाया चार सत्र की डीपीसी के बिना पद रिक्त नहीं हो रहे है।ं महात्मा गाँधी अंग्रेजी माध्यम वाले विधालयों में प्रतिनियुक्ति की परीक्षा का परिणाम जारी अब तक नहीं हुआ है। इसके साथ ही गृह जिलें के लिए विभाग ने 10 प्रतिशत बोनस अंक दिए पर न्यायालय ने रोक लगा रखी है। ऐसे में फिर से मामला खटाई में पडता नजर आ रहा है। इससे पहले ाजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को ज्ञापन दिया था व बताया था कि दो सालों से अधिशेष चल रहे हजारों शिक्षकों के समायोजन एवं कराए जा रहे स्टाफिंग पैटर्न में शिक्षा निदेशालय की ओर से काउंसलिंग की बजाय सीधे 26 सितंबर को पदस्थापन आदेश जारी किए गए हैं। राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ ने आक्रोश जताया व मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेज कर दखल की मांग की थी। दिव्यांग ,असाध्य रोगी,विधवा व महिला कार्मिकों को पूर्व की भांति वरीयता देते हुए वरिष्ठता के आधार पर शिक्षक कार्मिकों का परामर्श कैंप आयोजित करवाते हुए पदस्थापन दिलाए जाने की मांग की गई। प्रदेश अध्यक्ष शेर सिंह चौहान व प्रदेश महामंत्री राजेश शर्मा ने सरकार को प्रेषित ज्ञापन में लिखा था कि अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों सहित प्रदेश के समस्त राजकीय विद्यालयों में विभिन्न कारणों से अधिशेष चल रहे शिक्षक व कार्मिकों के समायोजन में 18 से 26 सितंबर तक करने के दिशा निर्देश निदेशक प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा राजस्थान बीकानेर के द्वारा प्रदेश के समस्त संयुक्त निदेशक व जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी किए गए। उक्त दिशा निर्देशों में काउंसलिंग कराये जाने का अभाव था। प्रदेश महामंत्री राजेश शर्मा ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के दौरान साल 2015 से नई नियुक्ति से मिलने वाली पोस्टिंग हों या शिक्षा विभाग में पदोन्नति पर पदस्थापन, समय-समय पर अधिशेष शिक्षकों के समायोजन हेतु विभिन्न स्तरों पर परामर्श कैंप आयोजन ( काउंसलिंग) के माध्यम से ही शिक्षकों को पदस्थापन देने के नियम निर्धारित कर रखे थे जो लगातार गहलोत सरकार में भी प्रभावी रहते आए हैं। लेकिन 6 सितंबर को शिक्षा निदेशालय की ओर से प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में बिभिन्न कारणों से चल रहे अधिशेष शिक्षक व कार्मिकों के समायोजन हेतु सीधे 26 सितंबर को पदस्थापन आदेश जारी करने के दिशा निर्देश दिए गए जो न्याय संगत नहीं थे। प्रदेश अध्यक्ष शेर सिंह चौहान का कहना था कि अधिशेष शिक्षक व कार्मिकों के समायोजन पदस्थापन में काउंसलिंग आयोजित नहीं करने से प्रदेश के तमाम जिलों में जिल शिक्षा अधिकारी कार्यालयों के कर्मचारी व अधिकारियों द्वारा मनमानी एवं भाई भतीजावाद उत्पन्न होने की प्रबल संभावना है साथ हीभ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिल सकता है। संघ ने मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री से निष्पक्ष एवं पारदर्शी पदस्थापन तथा शिक्षकों के स्वाभिमान व सम्मान कायम रहें इसलिए पिछले एक दशक से चली आ रही प्रक्रिया को यथावत रखवाते हुए दिव्यांग , असाध्य रोगी,विधवा व महिला कार्मिकों को पूर्व की भांति वरीयता देते हुए वरिष्ठता के आधार पर शिक्षक कार्मिकों की सूचियां तैयार कराकर परामर्श कैंप आयोजित करवाते हुए पदस्थापन दिलाए जाने हेतु संशोधित दिशा निर्देश जारी करवाने का आग्रह किया था।
37 हजार अधिशेष शिक्षकों के समायोजन का आदेश दूसरी बार स्थगित, विभाग को समझ नही आ रहा बिना रिक्त पदों का कैसे करें समायोजन, बकाया चार सत्र की डीपीसी के बिना पद नहीं हो रहे रिक्त , महात्मा गाँधी अंग्रेजी माध्यम वाले विधालयों में प्रतिनियुक्ति की परीक्षा का परिणाम नहीं हुआ जारी, गृह जिलें के लिए विभाग ने 10 प्रतिशत बोनस अंक दिए पर न्यायालय ने लगाई रोक

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