24 न्यूज़ अपडेट उदयपुर. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ शंकर एच बामनिया ने बताया कि आज जिले में 15 स्वास्थ्य केन्द्रों पर शिविर आयोजित किए गए।गिर्वा में पीएचसी चणावदा और लकडवास, कुराबड़ में पीएचसी जगत, झाड़ोल में सीएचसी मादड़ी,फलासिया में पीएचसी पानरवा,सायरा में सीएचसी पदराडा, कोटडा में सीएचसी बेकरिया, खेरवाड़ा में पीएचसी ढीकावास और सीएचसी बावलवाडा, नयागांव में पीएचसी कनबई, ऋषभदेव में पीएचसी पीपली ब, भींडर में उप जिला चिकित्सालय भींडर,वल्लभनगर में सीएचसी मोड़ी ,मावली में सीएचसी घासा और ईंटाली में शिविरों का आयोजन किया गया। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ टेली कंसल्टेंसी, गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच व टीकाकरण, बच्चों का टीकाकरण, 30 वर्ष से अधिक आयु वालो की डायबिटीज, हायपरटेंशन , कैंसर, टीबी स्क्रीनिंग, आंखों की जांच,दन्त रोगों की पहचान, कुपोषण के लिए जानकारी, परिवार कल्याण साधनों का वितरण,आभा आईडी बनाने और आयुष्मान कार्ड का वितरण और ई केवायसी करवाई गई। शिविर में 37 प्रकार की जांचे निशुल्क करवायी गयी। संयुक्त निदेशक ने किया आयुष्मान आरोग्य शिविर का निरीक्षण संयुक्त निदेशक डॉ प्रकाश चंद्र शर्मा ने सीएचसी घासा में आयोजित शिविर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बीसीएमओ डॉ मनोहर सिंह यादव, डीपीएम सदाकत अहमद और बीपीएम हितेश सामर उपस्थित थे।सीएमएचओ डॉ शंकर एच बामनिया ने चणावदा में आयोजित शिविर का निरीक्षण किया।सीएमएचओ द्वितीय डॉ जी एम सैयद ने उप जिला चिकित्सालय भींडर और सीएचसी मोड़ी,एडिशनल सीएमएचओ डॉ रागिनी अग्रवाल ने लकडवास और जगत, डिप्टी सीएमएचओ डॉ अंकित जैन ने ढीकावास और बावलवाडा, डिप्टी सीएमएचओ द्वितीय डॉ ओ पी रायपुरिया ने इंटाली और घासा,डी आरसीएचओ डॉ अशोक आदित्य ने बेकरिया और पदराडा,डीटीओ डॉ आशुतोष सिंघल ने कनबई और पीपली ब, का निरीक्षण किया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation उदयपुर के पहलवानो ने राष्ट्रीय कुराश प्रतियोगिता मे जीते दो ब्रोज़ मैडल क्या यह सच है आधा, हर बार कैसे अपराधी हो जाते हैं ‘‘पगबाधा!‘‘ बीच रास्ते के थानों-चौकियों में क्यों नहीं करवाते ‘‘लघुशंका’’??