24 न्यूज अपडेट.ब्यूरो। होली पर्व के अवसर पर पेड़ों को बचाने, पर्यावरण संरक्षण और वातावरण में शुद्धता के लिए भीलवाड़ा की माधव गोशाला की ओर से गोबर से कंडे, बड़कुले और गोबर के नारियल का निर्माण कर इन्हें सेल किया जा रहा है। शहर में होली के अवसर पर करीब डेढ़ लाख से अधिक कंडे होली जलाने वाली संस्थाओं तक न्यूनतम दर पर पहुंचाया जाएगा। होली के अवसर पर जलने वाले पेड़ों को काटने से बचाया जाएगा। साथ ही होली के दौरान जलने वाले कचरे व अन्य वस्तुओं पर भी रोक लगाकर शुद्ध गोबर के कंडों और कपूर का यूज कर होली जलने के दौरान वातावरण की शुद्धता पर विशेष ध्यान दें, इसके महत्व को और अधिक बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। गोशाला में पूरे वर्ष पर ही गाय के गोबर से कंडे बनाये जाते हैं लेकिन होली पर करीब एक महीने पहले से विशेष तैयारी की जाती है । इसके तहत होली पर में जलाए जाने वाले गोबर के बड़कुले , गोबर से बनी हवन की टिकिया , गोबर से बनने वाले नारियल आदि का भी निर्माण किया जाता है । इसके लिए गोशाला में कार्यरत महिलाएं इन्हें बनती है । संस्था का उद्देश्य अधिक से अधिक गोवंश संवर्धन और संरक्षण के साथ ही विशेष रूप से पर्यावरण का ध्यान रखना ।
होली जलाने के लिए पेड़ नहीं काटे इसके लिए माधव गोशाला सहित शहर की अन्य गोशाला में गोबर से लकड़ी , कंडे व बड़कुलियों की माला और हवन टिकिया बनाई जा रही है । शहर के करीब 55 से अधिक संस्थाओं ने गोशाला में कंडों की बुकिंग कराई है । इन संस्थाओं द्वारा जलाई होली में पेड़ों के स्थान पर कंडों का दहन होगा । निश्चित रूप से इसे पर्यावरण संरक्षण संवर्धन की ओर एक सराहनीय कदम माना जा सकता है ।
1.50 लाख कंडों से होगा होलिका दहनःभीलवाड़ा में 55 से ज्यादा जगह दहन में इस्तेमाल होगा

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