बाजार हुए गुलजार, कल खेली जाएगी रंगों वाली होली
उदयपुर। होलिका दहन आज शाम को होगा। पुराने शहर में जगदीश चौक, सुभाष चौराहा, सिटी पैलेस, मोती चौहट्टा, भट्टीयानी चौहट्टा, रावजी का हाटा सहित कॉलोनियों सहित शहर में 300 से ज्यादा जगह होली जलाई जाएगी। सोमवार को धुलंडी पर शहर से लेकर गांव-कस्बों तक रंगों का उल्लास बिखरेगा। शनिवार को जगदीश मंदिर में फागोत्सव खूब जमा। भक्तों की भीड उमडी। ठाकुरजी को फाग खेलाने के बाद पुजारी-सेवादारों ने श्रद्धालुओं पर जमकर गुलाल डाला तो सब सरोबार होकर नाचने लगे। सबसे बड़ी होली सुभाष चौराहा मल्लातलाई पर बनाई गई है। इसके अलावा जगदीश चौक में मंच सजकर तैयार है व होलिका दहन से पूर्व यहां भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का जोर रहेगा। इसके अलावा गली-मोहल्लों में दिन में मार्किंग हुई व शाम तक होली तैयार करने का उपक्रम चलता रहा। होली के रंग मे ंविदेशी भी रंगे हैं, वे भी कौतूहल से त्योहार की उमंग का आनंद ले रहे हैं व रंग खरीदने वालों से पूछपरख कर रहे हैं। मिठायों व रंगों, पिचकारियों की दुकानों पर तो मेला लगा हुआ है।
इससे पहले सवेरे से ही महिलाएं होलिका स्थल पर जाकर होली की पूजन कर सुख समृद्धी की कामना कर रही हैं। महिलाएं मंगल गीत गाती हुई होलिका स्थल पर पहुंची। इसके बाद पूजन किया। इस मौके घर में बनाए गए बड़कूले होलिका को चढ़ाए गए। साथ ही नव विवाहित जोड़ों ने भी धोक लगाई। होली के समय से बंसत ऋतु की शुरू होती है। बसंत ऋतु के स्वागत में ये पर्व मनाया जाता है। एक अन्य मान्यता है कि कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या भंग करने के लिए बसंत ऋतु को प्रकट किया था। शिव जी कामदेव के इस काम की वजह से बहुत क्रोधित हो गए थे। भगवान ने जैसे ही अपना तीसरा नेत्र खोला, कामदेव भस्म हो गए। ये फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि की ही घटना मानी गई है।

