24 न्यूज अपडेट उदयपुर। देश की सर्वोच्च अदालत में आज एक महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई के बाद NEET काउंसलिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। आपको बता दे की सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका स्टूडेंट शिवांगी मिश्रा और 9 अन्य विद्यार्थियों ने परीक्षा परिणाम की घोषणा से पहले 1 जून को दायर की थी। इसमें में याचिका में बिहार और राजस्थान के परीक्षा केंद्र पर गलत प्रश्नपत्र बांटने के कारण हुई गड़बड़ी की शिकायत की गई थी और पूरी परीक्षा को रद्द कर एसआईटी जांच की मांग की गई थी। इस पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इधर, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने काउंसलिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, परीक्षा कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA से कहा- NEET UG की पवित्रता प्रभावित हुई है। हमें इसका जवाब चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में हाउ इस मामले में अगली सुनवाई 8 जुलाई को प्रस्तावित की गई है. इस मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की वेकेशन बेंच ने ।
आपको यह भी बता दे की 10 जून को भी दायर की गई थी याचिकाएं पैर की गई थी याचिका दायर की गई थी दिन में सर्वोच्च न्यायालय में 10 जून को भी NEET रिजल्ट पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इन मामलों में याचिकाकर्ताओं ने NEET UG एग्जाम 2024 में ग्रेस मार्क्स देने में मनमानी का आरोप लगाया है। यही नहीं एक एग्जाम सेंटर के 67 कैंडिडेट्स को पूरे 720 मिले हैं, इस पर भी याचिकाकर्ताओं ने संदेह जताया है। इसी प्रकार सुप्रीम कोर्ट में दायर नई याचिका में 5 मई को आयोजित NEET UG एग्जाम का पेपर लीक होने की व्यापक शिकायतों का भी हवाला दिया गया है।
तेलंगाना और आंध प्रदेश से दायर हुई याचिका
इधर नीट के ही एक मामले में याचिका में कहा गया था कि रिजल्ट में इस परीक्षा के परिणाम में ग्रेस मार्क्स देना NTA का मनमाना फैसला है। स्टूडेंट्स को विद्यार्थियों को 718 या 719 मार्क्स देने का कोई तार्किक और गणितीय आधार नहीं है । ये याचिका स्टूडेंट वेलफेयर के लिए काम करने वाले अब्दुल्लाह मोहम्मद फैज और डॉक्टर शेख रोशन ने दायर की थी।
आपको बता दें कि देश भर में NEET-UG 2024 को लेकर अलग-अलग राज्यों में लगभग 20 हजार स्टूडेंट्स ने याचिका दायर की थीं, जिसमें परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत की गई थी। इस परीक्षा में ग्रेस मार्क्स के खिलाफ दायर की गई याचिकायाचिका में कहा गया है कि NTA ने अब तक ये नहीं बताया कि उन्होंने स्टूडेंट्स को ग्रेस मार्क्स देने के लिए क्या तरीका अपनाया है। वहीं, एग्जाम के पहले NTA की तरफ से जारी की गई इन्फॉर्मेशन बुलेटिन में भी ग्रेस मार्क्स देने के प्रावधान का जिक्र नहीं किया गया था। ऐसे में कुछ कैंडिडेट्स को ग्रेस मार्क्स देना सही नहीं है।
2015 में कोर्ट के आदेश से रद्द करनी पड़ी थी AIPMT
अगर इन परीक्षाओं का इतिहास देखें तो हम पाते हैं कि मेडिकल के लिए आयोजित की गई प्रवेश परीक्षाओं में वर्ष 2015 में जो एआईपीएमटी परीक्षा हुई थी उसमें भी पेपर लीक के कारण रद्द हुई करनी पड़ी थी। उसे समय सीबीएसई ने की ओर से कोर्ट में कहा गया था कि 44 छात्र ही पेपर लीक में लिप्त थे। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को नहीं माना और फिर से परीक्षा करवानी पड़ी थी।
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