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सीईटी में बौद्धिक हम्माली : दूर-दराज के गुरूजनों की तीन दिन तक 12 घंटे की ‘चक्की पिसिंग’ वाली ड्यूटी, 600 रूपए मजदूरी, विरोध की आवाज बुलंद

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24 न्यूज अपडेट. उदयपुर। सब कामों के लिए प्रशासन को केवल गुरूजी ही मिलते हैं। उस पर भी विरोध करने पर प्रशासनिक धौंस दिखाई जाती है। जबकि प्रशासन चाहे तो किसी भी डिपार्टमेंट के लोगों को परीक्षा व्यवस्था में लगा सकता है लेकिन ले देकर हर बार शिक्षक को ही झोंक दिया जाता है। आगामी 22 से 24 अक्टूबर को आयोजित परीक्षा में तीन दिन लगातार दोनों पारियों में शिक्षकों को हार्ड ड्यूटी लगा दी गई है। दूर दराज के शिक्षकों से तीन दिन तक लगातार ड्यूटी को कहा गया है जो किसी भी नियम के तहत नहीं आता है। पूछा जा रहा है कि सारी प्रशासनिक निर्भरता शिक्षकों के सिर पर ही क्यों? यदि जरूरी भी है तो ज्यादा से ज्यादा एक दिन चक्की पिसिंग वाले सिस्टम में काम में लिया जा सकता है, मगर यहां तो तीन-तीन दिन तक के लिए झोंका जा रहा है। सीईटी परीक्षा का मानदेय भी चौकीदारी वाली न्यूनतम मजदूरी से कम है। क्या इसे बौद्धिक हम्माली नहीं कहना चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि ढर्रा सुधारे, सुनियोजित रूप से सबकी सहमति व सहूलियत के हिसाब से ड्यूटी लगाए। बताया जा रहा है कि कई शिक्षकों को तो 40,50 किलोमीटर दूर से आना होगा। जिसका उन्हें नहीं मिलेगा कोई यात्रा भत्ता। तीन दिन ठहरने की भी करनी होगी व्यवस्था। शेड्यूल ऐसा है कि खाना खाने तक का समय नहीं मिलेगा। सुबह 7 से 8 वीक्षक करेंगे डॉक्यूमेंट्स की जांच,देंगे परीक्षार्थियों को प्रवेश। फिर कक्षों में जांच,कमरे में नहीं होगी कोई कुर्सी,लगातार सवा चार घंटे खड़े रहना होगा। 1.00 बजे से फिर वही क्रम। 6.10 परीक्षा खत्म करवा ओएमआर जमा करवा,पैकिंग,विदाई तक 7.00 बजे तक फ्री होकर घर पहुंचेंगे 9.00 बजे। फिर यही क्रम दूसरे दिन ,तीसरे दिन भी चलेगा। विरोध पर कहा जा रहा है कि नौकरी है करनी होगी, भले आप किसी भी हाल में हो.. कोई सुनने वाला नहीं है।
एक मजदूर से भी बदतर हालात
पूछा जा रहा है कि 12 घण्टे लगातार ड्यूटी कौनसे नियम में आती है। 40,50 किलोमीटर से भी दूर पदस्थापित शिक्षकों की ड्यूटी लगाना वो भी बिना इच्छा या सहमति के आखिर क्यों जरूरी है। जिला कलेक्टर से आग्रह किया गया है कि वीक्षकों को राहत प्रदान करते हुए एक पारी में ही ड्यूटी लगाई जाए। इसके साथ्ज्ञ ही गूगल लिंक जारी कर आवेदन प्राप्त कर इच्छुक शिक्षकों को ही वीक्षण कार्य हेतु लगाया जाए। आपको बता दें कि कई शिक्षक कोटड़ा , झाड़ोंल, फलासिया , खेरवाड़ा जैसे 100 से 150 किलोमीटर दूर स्थित ब्लॉक से आएंगे।

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