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सरस्वती किसी भी रूप में हो उसका अपमान नहीं होना चाहिए- महासाध्वी श्री प्रतिभा श्रीजी म.सा.

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कविता पारख

24 न्यूज़ अपडेट निम्बाहेड़ा। जैन दिवाकर भवन निंबाहेड़ा में जैन सिद्धांताचार्य साध्वी मधुर गायिका प्रतिभा श्रीजी म.सा., प्रेक्षा श्री जी म.सा. एवं प्रेरणा श्री जी म.सा. आदि ठाणा तीन चातुर्मास आराधना में विराजित है। बुधवार को ज्ञान पंचमी के शुभ अवसर पर मां सरस्वती की महिमा बताते हुए साध्वी प्रतिभा श्री जी म.सा. ने कहा कि दीपावली पर्व के बाद कार्तिक माह की शुक्ल पंचमी से सरस्वती वंदना के पंचमी उपवास रखे जाते हैं। यह उपवास 5 वर्ष तक चलते हैं। इन्हें संयमित रूप से करने से ज्ञान में वृद्धि होती है, साथ में णमो णाणस मंत्र के जप की महिमा भी बताई। उद्बोधन के दौरान प्रतिभा श्री जी म.सा. ने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति की जिह्वा पर सरस्वती का वास होता है, यदि ज्ञान होगा तो उसकी वाणी मधुर निकलेगी और उसका यश पूरे समाज में और क्षेत्र में बढ़ेगा ज्ञानी व्यक्ति हमेशा पूजा जाता है।
श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि संत समाज का हिस्सा है, संतों का अपमान नहीं करना चाहिए, गुरुओं की बातों को ध्यान से सुनना चाहिए। इस अवसर पर संघ अध्यक्ष विजय कुमार मारू ने बताया कि चातुर्मास के दौरान महासतियों द्वारा समाज को एकजुट करने के साथ-साथ जेन धर्म के विषय में महत्वपूर्ण और अच्छी जानकारी दी गई। बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दूर-दराज से श्रावक श्राविकाएं उपस्थित रहे।

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